महिला को अस्पताल ले जा रहे परिजनों से नाम पता पूछती पुलिस
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यूपी में बिजनौर के मंडावर क्षेत्र में हुए बड़े नाव हादसे में एक महिला की जान बच सकती थीं लेकिन, यूपी पुलिस के एक दरोगा की संवेदनहीनता और लापरवाही की वजह से महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। आरोप है कि एक दरोगा ने कानून का पाठ पढ़ाकर परिजनों को काफी देर तक घाट पर ही रोके रखा। वे महिला के जिंदा होने का दावा कर रहे थे और उसे बाइक पर ही जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत करार दिया। हेलीकाप्टर से भी गंगा में डूबे लोगों की तलाश की गई, पर सफलता नहीं मिली। एनडीआरएफ की टीम सुबह से ही गंगा में सर्च ऑपरेशन चला रही है, लेकिन बाकी 9 लापता लोगों के बारे में कोई पता नहीं चला।
शुक्रवार को मंडावर क्षेत्र के गांव चाहड़वाला के सामने डेबलगढ़ (राजारामपुर) के गांव वालों से लदी नाव गंगा की बीच धारा में पलट गई थी। हादसे में नाव में सवार सभी 28 लोग बह गए थे। 17 लोग सकुशल गंगा से बाहर निकाल लिए गए। एक महिला का शव गांव रावली से आगे गंगा से मिल गया था। दस गांव वाले लापता थे। शुक्रवार शाम तेज बारिश व अंधेरा होने के कारण गंगा में डूबे लोगों की तलाश का काम रोक दिया गया था। जिन परिवारों के लोग लापता थे वे सारी रात चिंतित रहे। दिन निकलते ही वे खुद ही नाव लेकर गंगा में डूबे लोगों की तलाश में निकल पड़े। इस दौरान सुबह करीब साढ़े दस बजे नरोल्लापुर गुरुद्वारे से आगे गंगा के किनारे डेबलगढ़ निवासी मूलचंद की 46 वर्षीय पत्नी मीना देवी झाड़ी में अटकी दिखी। परिजनों ने दावा किया मीना देवी की सांस चल रही थी। वे उसे बाइक पर जिला अस्पताल ले जाने लगे तो वहां मौजूद एक दरोगा ने पहले कागजी कार्रवाई करने के लिए उन्हें रोक लिया। परिजन गुहार लगाते रहे कि उन्हें जाने दें वरना महिला मर जाएगी। पर दरोगा ने एक नहीं सुनी और मृतका का नाम पता मालूम करने में जुटा रहा।