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Meerut News: खून देकर किया महादान तो हुई बीमारियों की पहचान

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खून देकर किया महादान तो हुई बीमारियों की पहचान
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रक्तदान करने वाले 201 युवाओं को निकला हेपेटाइटिस-एचआईवी

सरकारी ब्लड बैंकों की 2023 की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

- नष्ट कराया गया रक्त, इलाज किया गया शुरू

माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। युवाओं को पता ही नहीं चल रहा और वे एचआईवी और हेपेटाइटिस बी व सी की चपेट में आ रहे हैं। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के ब्लड बैंकों की इस साल सितंबर तक की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जिला अस्पताल और मेडिकल में इस दौरान 201 रक्तदान करने वाले हेपेटाइटिस सी व बी और एचआईवी के शिकार निकले हैं। इनमें अधिकांश 25 से 50 आयु वर्ग के हैं।
एलएलआरएम मेडिकल के ब्लड बैंक में एक जनवरी 2023 से 30 सितंबर 2023 तक जो 201 रक्तदाता बीमार मिले हैं, जिनमें 15 एचआईवी पॉजिटिव हैं। 81 हेपेटाइटिस सी और 53 हेपेटाइटिस बी से पीड़ित पाए गए। वहीं, जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की रिपोर्ट में 7 लोग एचआईवी पॉजिटिव, 27 हेपेटाइटिस सी और 18 हेपेटाइटिस बी से पीड़ित निकले। जांच के बाद बीमार लोगों का खून नष्ट कर दिया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन लोगों से संपर्क किया और इलाज शुरू कराया है।
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समय पर इलाज से ठीक हो सकता है हेपेटाइटिस-सी
मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. प्रिया ने बताया कि हेपेटाइटिस सी (यकृतशोथ ग) इसे काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है। इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है। इस बीमारी का पता शुरू में नहीं लग पाता। इस कारण यह जानलेवा हो जाती है। मेडिकल में इसका इलाज निशुल्क किया जा रहा है।

जानलेवा है हेपेटाइटिस-बी
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि हेपेटाइटिस बी (यकृतशोथ बी) एक संक्रामक बीमारी है। इसके कारण लीवर की सूजन और जलन पैदा होती है। इसके वायरस का संचरण संक्रमित रक्त या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में जाने से होता है। इसका इलाज वायरस रोधी दवाओं से किया जाता है। ये दवाएं खून में वायरस की मात्रा घटा सकती हैं या उन्हें हटा सकती हैं, जिससे लीवर सिरोसिस या लीवर कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।

शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है एचआईवी
मेडिकल के एंटी रिट्रो वायरल ट्रीटमेंट (एआरटी) सेंटर के प्रभारी रहे वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य ने बताया कि एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस) एक ऐसा वायरस है, जिसकी वजह से एड्स होता है। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। जिस इंसान में इस वायरस की मौजूदगी होती है, उसे एचआईवी पॉजिटिव कहते हैं। आमतौर पर लोग एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब ही एड्स समझने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। एचआईवी के शरीर में दाखिल होने के बाद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और शरीर पर तरह तरह की बीमारियां और इंफेक्शन पैदा करने वाले वायरस अटैक करने लगते हैं। एचआईवी पॉजिटिव होने के करीब 8-10 साल बाद इन तमाम बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है। वैसे, एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद से एड्स होने तक के अंतराल को दवाओं की मदद से बढ़ाया जा सकता है और कुछ बीमारियों को ठीक भी किया जा सकता है। मेडिकल के एआरटी सेंटर में इनका इलाज किया जाता है।
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इन कारणों से होती हैं ये बीमारियां
- दूषित सिरिंज का उपयोग करना।
- दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल।
- दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस द्वारा।
- दूषित सुई से टैटू बनवाना या एक्यूपंचर करवाना।
- असुरक्षित यौन संबंध।

सतर्क रहें तो नहीं है खतरा
कोई भी ऐसा कार्य या गतिविधि जिसमें खून से खून का संपर्क होने की संभावना है, संक्रमण का संभावित स्रोत हो सकता है। अगर सावधानी बरतें, तो इन बीमारियों से बचे रह सकते हैं।
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