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किसानों ने याद दिलाई पुरानी धमक, 1988 में पूरी दुनिया में छा गए थे भाकियू और मेरठ

Sat, 29 Sep 2018 03:03 PM IST
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
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किसान क्रांति यात्रा
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किसान मसीहा बाबा महेंद्र सिंह टिकैत और उनकी भाकियू के इंकलाबी इतिहास में मेरठ का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। देश ही नहीं पूरी दुनिया में मेरठ और भाकियू एक साथ सुर्खियों में रहे थे। 27 जनवरी 1988 से लेकर 19 फरवरी 1988 तक के वो 25 दिन शायद ही कोई मेरठ वासी अभी तक भूल पाया हो। किसानों की समस्याओं को लेकर मेरठ कमिश्नरी के समीप सीडीए मैदान में भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में लाखों किसानों जमा थे। देखते ही देखते कमिश्नर के आसपास ही नहीं सीडीए का मैदान भाकियू के आंदोलन में तब्दील हो गया।

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लाखों की संख्या में आए किसानों के आंदोलन की आग के शोले लखनऊ तक भड़के। उनके आंदोलन को कुचलने के लिए तत्कालीन कमिश्नर वीके दीवान ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरबहादुर सिंह से बात करके 20 कंपनी पीएसी, 11 कंपनी सीआरपीएफ लगाई। इस आंदोलन के दौरान सात किसानों की ठंड से मौत भी हुई लेकिन किसानों ने धैर्य नहीं छोड़ा और हक के लिए लड़ाई लड़ते रहे। उस वक्त फोर्स नहीं बल्कि किसानों ने स्वयं ही यातायात व्यवस्था का संचालन किया था। किसी की हिम्मत धरना स्थल की ओर वाहन ले जाने की नहीं होती थी। 

लोकदल के अध्यक्ष हेमवती नंदन बहुगुणा, पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पत्नी गायत्री देवी, चौधरी अजित सिंह, मेनका गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह, पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा, शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी समेत देश भर के नेताओं का यहां तांता लगा रहा और टिकैत के आंदोलन का समर्थन किया।

भाकियू किसान यात्रा - फोटो : अमर उजाला
यह एक ऐसा मंजर था जो न किसी ने देखा था और न शायद किसी को देखने को मिले। ये क्षण शहर के लोगों को हैरत में डालने वाले थे। टिकैत की एक झलक और उनकी ठेठ बोली भी लोगों को बेहद लुभाती थी। आंदोलन के 24 दिन बाद प्रदेश सरकार की ओर से मंत्री सईदुल हसन व हुकुम सिंह ने किसानों के बीच आकर उनसे वार्ता की। इस पर यहां धरना तो समाप्त हो गया पर टिकैत ने प्रदेश सरकार के खिलाफअसहयोग आंदोलन चलाने की घोषणा कर दी थी।
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याद दिलाई पुरानी धमक
लंबे समय बाद ही नहीं बल्कि पहली बार निकाली जा रही किसान पदयात्रा ने भाकियू की फिर पुरानी धाक की याद दिला दी है। यात्रा में साथ चल रहे किसानों का रैला बढ़ता ही जा रहा है। किसानों में सरकार के खिलाफ पहले जैसा ही आक्रोश नजर आ रहा है। रणसिंघा की आवाज गूंज रही है और किसान बाबा टिकैत अमर रहे का नारा गुंजायमान करते हुए दिल्ली की तरफ बढ़ रहे हैं। 

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