बीएड में एडमिशन को लेकर हालत बेहद खराब है। एससी छात्रों के सहारे कॉलेज चल रहे हैं। सत्र 2016-18 में 50 प्रतिशत से अधिक एडमिशन एससी छात्रों के हुए हैं। मेरठ और सहारनपुर मंडल के कॉलेजों में कहीं-कहीं तो आंकड़ा 80 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह संयोग नहीं बल्कि सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। छात्र नहीं मिल रहे तो कॉलेज शुल्क प्रतिपूर्ति के भरोसे छात्रों का जुगाड़ कर रहे हैं। शहर और गांवों में एससी छात्र खोजे गए हैं। सूत्रों की माने तो बाकायदा उनसे डील हुई है।
बीएड के बढ़ती सीट और रोजगार नहीं मिलने की वजह से पिछले दो-तीन साल में बीएड एडमिशन में भारी गिरावट आई है। हाल यह है कि आधी सीट भरना भी कॉलेजों के लिए मुश्किल हो रहा है। वह तमाम जतन कर रहे हैं। एंट्रेंस दिलाने से पहले ही गांव और शहरों में एससी छात्रों का जुगाड़ किया गया था। उनके आवेदन से लेकर एडमिशन तक की सब जिम्मेदारी कॉलेजों ने उठाई है। मेरठ में बीएड काउंसिलिंग के तीन सेंटर एमआईईटी, विद्या नॉलेज पार्क और आईआईएमटी को बनाया गया था।
काउंसिलिंग सेंटरों के इनपुट के मुताबिक 50 प्रतिशत से अधिक एडमिशन एससी छात्र-छात्राओं का हुआ है। शासन से इनको शुल्क प्रतिपूर्ति मिलेगी, इसलिए कॉलेजों ने यह निवेश किया है। उधर, रविवार से प्रदेश में बीएड की पूल काउंसिलिंग शुरू हुई। जिनकी काउंसिलिंग छूट गई थी और जिन्होंने च्वॉइस लॉक के बाद एडमिशन नहीं लिया, उन्हें एक मौका और दिया है। पूल काउंसिलिंग के पहले दिन रेस्पांस अच्छा नहीं रहा। एक रैंक से 90 हजार रैंक तक के अभ्यर्थियों को बुलाया गया था।
एमआईईटी सेंटर पर 1305 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे। काउंसिलिंग सिर्फ 29 की हुई। विद्या नॉलेज पार्क में 1500 रजिस्टर्ड थे और काउंसिलिंग 36 ने कराई। इसी तरह आईआईएमटी में करीब 1400 से रजिस्टर्ड अभ्यर्थियों में से 52 की काउंसिलिंग हुई। सोमवार को 90001 रैंक से 1.8 लाख रैंक की तक की काउंसिलिंग है। मंगलवार को 180001 रैंक से आखिर तक अभ्यर्थियों को बुलाया गया था।