सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, नगीना द्वारा बासमती धान की नई किस्म नगीना वल्लभ बासमती-1 विकसित की गई है। इसका विमोचन प्रदेश प्रजाति विमोचन समिति द्वारा लखनऊ में किया गया। इस किस्म की खास बात है कि यह उपज में तो ज्यादा होगा ही साथ ही रोग इसे प्रभावित नहीं कर पाएगा। जानें इस नई किस्म की खूबियां:-
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के निदेशक शोध प्रो. अनिल सिरोही ने बताया कि अच्छे उत्पादन में उन्नत किस्मों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। नई धान किस्म नगीना वल्लभ बासमती-1 को पूसा सुगंध-5 एवं उन्नत पूसा बासमती-1 से विकसित किया गया है। यह किस्म रोगों एवं कीटों के लिए मध्यम अवरोधी है। इस किस्म में गर्दन तोड़ (ब्लास्ट) रोग नहीं लगेगा। इससे किसानों को फायदा होगा।
उन्होंने बताया कि राजकीय स्तर के परीक्षणों में इस किस्म का औसत उपज 63 कुंतल प्रति हेक्टेयर पाई गई है। जो कि पूसा बासमती-1 से 39 प्रतिशत तथा तरावडी बासमती से 123 प्रतिशत अधिक पाई गई है। इस प्रजाति के पौधों की ऊंचाई लगभग 100 से 105 सेमी की होती हैं, जिस कारण खेत में खड़ी फसल कटाई होने तक नहीं गिरती। इसकी कुकिंग क्वालिटी पूसा बासमती-1 से अच्छी है। पकने पर इसका चावल पूसा बासमती-1 से अधिक लंबा होता है। इस किस्म के बीज के लिए किसान आगामी वर्षों में क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, नगीना एवं विश्वविद्यालय मुख्यालय मोदीपुरम से संपर्क कर सकते हैं। जहां से किसानों को सही दाम पर बीज मिल जाएगा।
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