आरोपियों में सुधीर, कालू, नीरज और बाबू भड़ल का नाम जोड़ा गया था। मामले की सुनवाई जिला जज संतोष राय की कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह पेश किए।
फरार होने के कारण आरोपी कालू व रामबली की पत्रावली अलग कर दी गई। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इकबाल, ओमप्रकाश, सुधीर, नीरज और बाबू भड़ल को दोषी करार दिया।
धारा 302 में उम्रकैद और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 307 में सात साल पांच हजार रुपये अर्थदंड, धारा 148 में दो साल दो हजार रुपये अर्थदंड और धारा 506 में चार साल और तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
ओम प्रकाश और सुधीर को आर्म्स एक्ट में दो साल की सजा और दो हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माने की धनराशि से 80 प्रतिशत वादी को देने होंगे। बाबू भड़ल और ओमप्रकाश दोघट थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं।
यह था रंजिश का कारण
निरपुड़ा गांव के इकबाल के बेटे कविंद्र की साल 2009 में निरपुड़ा में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या में ब्रजपाल को 120बी का आरोपी बनाया गया। अदालत से ब्रजपाल को बरी कर दिया गया था। इसी रंजिश में इस वारदात अंजाम दिया गया।
कालू की पत्रावली अलग, रामबली का सुराग नहीं
आरोपी कालू कई साल फरार रहा था। बाद में पुलिस ने पकड़कर उसे अदालत में पेश किया। उसकी पत्रावली अलग चल रही है। आरोपी रामबली फरार है, जिसका सुराग आज तक पुलिस नहीं लगा सकी है।
गवाह पर हुआ था हमला
पिता के केस की पैरवी करने के दौरान मृतक के बेटे गवाह निश्चय राणा पर भी गुफा मंदिर के पास हमला हुआ था। बाद में उसे सुरक्षा दिलाई गई। अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह पेश किए।
प्रधान ने कहा मिला इंसाफ
निरपुड़ा की प्रधान मनुेश देवी सोमवार को अदालत पहुंची। उन्होंने कहा कि पति की हत्या में आठ साल बाद उन्हें इंसाफ मिला है।