बागपत जनपद में जेल प्रशासन ने करीब दो साल पहले हुई मुन्ना बजरंगी की हत्या से कोई सबक नहीं सीखा। मोबाइल, कट्टन और नशे का सामान मिलना जेल में आम है। ऋषिपाल की हत्या से एक बार फिर साबित हो गया कि जेल पर प्रशासन का कोई कंट्रोल नहीं है। बंदी जब चाहे खूनी खेल खेलते हैं।
जिला कारागार की क्षमता 660 बंदियों की है। वर्तमान में यहां पर करीब सात सौ बंदी है। कोरोना संक्रमण के कारण ही अब तक 150 बंदियों को छोड़ा गया है। जबकि नए बंदियों के लिए अस्थायी जेल बनाई गई है। सात सौ बंदियों पर कंट्रोल के लिए सिर्फ 22 बंदीरक्षक हैं। मुन्ना बजरंगी हत्याकांड के बाद से ही शासन से बंदीरक्षकों की मांग चल रही है, लेकिन अब तक किसी ने सुध नहीं ली। हालात यह है कि जिला कारागार में नंबरदारों का दखल है। यही वजह है कि गुटबाजी के चलते आए दिन झगड़े होते हैं। मोबाइल मिलना आम है। मोबाइल से रंगदारी मांगने के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन बंदियों की हरकतों पर कोई नियंत्रण अब तक नहीं हो सका है।
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जेल में फिर टकराव की आशंका
पुलिस की जांच में सामने आया है कि बबलू कश्यप और ऋषिपाल का दो अलग-अलग गुटों से ताल्लुक हैं। जिसके चलते मामूली कहासुनी के बाद झगड़े ने खूनी रूप लिया। हत्या के तार बसी गांव से भी जोड़कर देखे जा रहे हैं। आशंका है कि बंदियों के गुटों में फिर टकराव हो सकता है।
पांच घंटे तक छानबीन
जिला कारागार में वारदात के बाद सर्च अभियान चलाया गया। पांच घंटे तक छानबीन की गई। बैरकों की तलाशी हुई। डीएम शकुंतला गौतम, एसपी प्रताप गोपेंद्र यादव, एडीएम अमित कुमार सिंह, एएसपी अनिल कुमार सिंह, एसडीएम खेकड़ा राजपाल सिंह मौके पर पहुंचे और छानबीन की।
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