अयोध्या में 14 साल पहले हुए आतंकी हमले में नैनी जेल में बंद पांच आरोपियों को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुना दी। इन आरोपियों में सहारनपुर के कस्बा तीतरो निवासी डॉक्टर इरफान भी शामिल है। आरोपी इरफान ने अयोध्या में विस्फोट करने वाले आतंकियों की पूरी मदद की थी। अब न्यायालय ने इरफान को उसके किए की सजा सुना दी है।
दरअसल, अयोध्या में पांच जुलाई 2005 की सुबह रामलला परिसर की बैरिकेडिंग को विस्फोट करके उड़ा दिया था। विस्फोट करने वाले पांच आतंकियों को सुरक्षाकर्मियों ने मार गिराया था। मारे गए आतंकियों से बरामद मोबाइल फोन के सिम की जांच से घटना की साजिश रचने और आतंकियों को असलहे और वाहन उपलब्ध कराने वाले पांच लोगों के नाम प्रकाश में आए थे। इनमें तीतरों निवासी डॉक्टर इरफान का नाम भी शामिल था, जिसके चलते उसी दौरान पुलिस टीम ने डॉक्टर इरफान को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में यह खुलासा हुआ था कि आरोपी इरफान और अन्य आरोपियों ने आतंकियों की पूरी मदद की थी। इतना ही नहीं डॉक्टर इरफान आरोपियों को लेकर सहारनपुर जनपद में भी घूमा था और देवबंद भी लेकर गया था।
इसके अलावा डॉक्टर इरफान के मोबाइल फोन से आतंकियों से की गई बातचीत की सीडीआर भी केस की विवेचना में ठोस आधार बनी थी। क्योंकि उस समय यह भी बताया गया था कि आरोपी इरफान और आतंकियों के बीच कई बार बातें हुईं थीं।
वहीं अदालत के फैसले की जानकारी आरोपी डॉक्टर इरफान के परिवार तक भी पहुंच गई, तो परिवार के लोग गम में डूब गए। आसपास के लोगों को इसका पता चला, तो वह भी इरफान के घर इकट्ठा हो गए। इरफान की मां 80 वर्षीय जेबुनिशा को आंखों से अब कम दिखाई देता है, लेकिन उनके आंसू नहीं रुक रहे थे।
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