बड़ौत। टेंट व्यापारी सोहनलाल अग्रवाल व उनके बेटे विकास का शव पोस्टमार्टम के बाद बुधवार सुबह घर पहुंचने से पहले ही वहां रिश्तेदारों, व्यापारियों की भीड़ जमा थी। घर के आंगन में रखे शवों को देखकर सोहनलाल की मूकबधिर बेटी दिव्या कभी पिता के शव से लिपटकर किलकारी मारती तो कभी भाई के शव से लिपटकर रोती। यह सब देखकर वहां मौजूद सभी लोगों की आंखों से आंसू बहने लगे।
व्यापारी सोहनलाल की एक बेटी है, जो बचपन से न बोल सकती है और न सुन सकती है। केवल इशारों से बातों काे समझती है। बुधवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद पिता-पुत्र के शवों को घर पर लाया गया और उनको घर के आंगन में रख दिया गया। शवों को देखकर दिव्या खुद को संभाल नहीं पाई और लोगों की भीड़ से निकलकर पिता व भाई के शव से लिपटकर रोती रही। वहीं दिव्या की माता उषा तो पति व बेटे की मौत से बेसुध हैं। वह कुछ न बोलती हैं और न रोती हैं, बस एक टक देखती रहती हैं।
-अंतिम यात्रा में उमड़ी व्यापारियों की भीड़
टेंट व्यापारी सोहनलाल अग्रवाल और उनके बेटे विकास अग्रवाल का बुधवार सुबह पीएन शर्मा पार्क के पास स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। वहां पर भतीजे मोनू ने अपने चाचा सोहनलाल और चचेरे भाई विकास की चिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले उनकी अंतिम यात्रा में व्यापारियों की भीड़ रही।