कहावत है कि जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है। हाल ही में मेरठ के सलावा में खेल विवि के शिलान्यास कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी युवाओं को लेकर नारा दिया... जिस ओर युवा चलेगा उस ओर भारत चलेगा, जिस ओर भारत चलेगा उस ओर दुनिया चलेगी। लेकिन सवाल ये है कि यह संभव कैसे होगा। कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों पर रोक लगने के बाद से छात्र राजनीति हाशिए पर है।
पांच साल से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए। युवा पूछ रहे हैं कि क्या राजनीति का बेस नहीं होना चाहिए। क्या बेहतर लोकतंत्र के लिए पढ़े-लिखे नौजवानों को राजनीति का प्लेटफॉर्म नहीं मिलना चाहिए।
एक समय ऐसा था जब छात्रसंघ के पदाधिकारी हर छात्र की समस्या सुनते थे, लेकिन अब कैंपस-कॉलेजों में छात्र राजनीति हाशिए पर है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के परिक्षेत्र मेरठ और सहारनपुर मंडल के नौ जिलों की बात करें तो यहां पर 44 विधानसभा सीटें हैं।
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इस चुनाव में सिर्फ 12 उम्मीदवार ऐसे हैं, जो छात्र राजनीति से निकलकर आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा ऐसे उम्मीदवारों को भाजपा ने चार प्रत्याशियों को मैदान में उतारा। सपा ने तीन प्रत्याशियों को चुनाव में उतारा है। कांग्रेस ने दो और बसपा ने एक ऐसे प्रत्याशी को चुनाव में उतारा है।
- सतपाल मलिक पूर्व केंद्रीय मंत्री वर्तमान में मेघालय के राज्यपाल हैं। मेरठ कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष रहे ।
-स्वर्गीय वीरेश्वर त्यागी, पूर्व विधायक कैंट, मेरठ कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष रहे ।
-स्वर्गीय गोपाल वर्मा, लखीमपुर खीरी से विधायक रहे। एनएएस कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष रहे ।
-राजेंद्र शर्मा, पूर्व विधायक, मेरठ कॉलेज में छात्र राजनीति में सक्रिय रहे ।
-जगत सिंह, पूर्व एमएलसी मेरठ कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष रहे ।
-केके शर्मा पूर्व विधायक गाजियाबाद, मेरठ कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष रहे।