हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर मेंश्री 1008 तीन लोक महामंडल विधान में मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। पर्यूषण पर्व के सातवें दिन श्रद्धालुओं ने तप, त्याग और संयम के माध्यम से आत्मशुद्धि का संदेश ग्रहण किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिदिन की भांति ओंकार ध्वनि और मंत्रोच्चार के साथ हुआ।
शांतिधारा का सौभाग्य राजेंद्र कुमार जैन, पुष्पा जैन, रविंद्र जैन, अनमोल जैन और बेबी टिया जैन को प्राप्त हुआ। भगवान शांतिनाथ, भगवान मल्लिनाथ की सोलहकारण पूजन और दशलक्षण पूजन किया गया। तीन लोक महामंडल विधान में 24 तीर्थंकर अरिहंतों की पूजा-अर्चना कर इंद्रों ने मंडल पर श्रद्धापूर्वक अर्घ्य समर्पित किए।
मुनि प्रतीक सागर महाराज ने तप धर्म पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि तप के माध्यम से कर्मों की निर्जरा होती है और आत्म विशुद्धि जागृत होती है। जिस प्रकार सोने को अग्नि में तपाकर शुद्ध किया जाता है, उसी प्रकार तप के माध्यम से क्रोध, मान, माया, लोभ, ईर्ष्या और द्वेष सहित कर्मों की परतों को दूर किया जा सकता है। तप की महिमा अपरंपार है। तीर्थंकरों के कर्मों का क्षय भी तप के माध्यम से ही होता है। इसलिए मनुष्य को तप के माध्यम से कर्मों का नाश करने का प्रयास करना चाहिए।
क्षेत्राध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन ने कहा कि इच्छाओं को रोकना ही तप है। जैन धर्म में तप के 12 भेद बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन और जैन कुल की प्राप्ति सौभाग्य की बात है, इसलिए धर्म और आचार का पालन करते हुए तप करना चाहिए।
संगीतमय महाआरती, भक्ति और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। विजेताओं को पुरस्कार सुधा जैन की ओर से दिए गए। कार्यक्रम में महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, विजय कुमार जैन, प्रवीण जैन, प्रमोद जैन, प्रबंधक मुकेश जैन समेत श्रद्धालु मौजूद रहे।
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद