कई बड़ी प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए पदकों लाने का सफर जारी था। साल दर साल कुश्ती में ऊंचाईयों को छू रही थी। साल 2013 में पिता ओमप्रकाश सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई। जबकि छह महीने बाद ही भाई उदय सिंह की मेडिकल के पास सड़क दुघर्टना में मौत हो गई। छह महीने के भीतर पिता और भाई की मौत के बाद प्रियंका पूरी तरह टूट गई। हालत यह हुई कि वो डिप्रेशन में आ गई। प्रियंका की हालत को देख बड़े भाई सिंह राज व मां राकेश सिंह ने साहस बढ़ाया। लेकिन प्रियंका पूरी तरह टूट चुकी थी। मां व भाई लगातार कोच जबर सिंह सोम व अलका तोमर के संपर्क में थे। सभी प्रियंका के भविष्य को लेकर चिंतित थे।
करीब एक साल तक कुश्ती से दूर रही प्रियंका को दोबारा खेलने के लिये प्रेरित किया गया। परिवार व कुश्ती खिलाड़ियों के प्रयासों से प्रियंका फिर से कुश्ती में आने को तैयार हो गई। प्रियंका ने कुश्ती में शानदार वापिसी करते सफर जारी किया। अंतर राष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी अलका तोमर ने बताया मंगलवार को प्रियंका केरल में बतौर कोच ज्वाइन करने वाली है। प्रियंका ने शारीरिक शिक्षा से एमफिल किया है, जबकि कोच के लिये एनआईएस डिप्लोमा किया है।
प्रियंका ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सिंगापुर की सीनियर कामनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप में सिल्वर, गुहाटी के साउथ एशियन गेम्स में गोल्ड, राष्ट्रीय स्तर पर गोंडा की सीनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल, स्टेट स्तर पर गोरखपुर की सीनियर यूपी रेंसलिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल जीता। इसके अलावा वो राष्ट्रीय -अंतर राष्ट्रीय स्तर, स्टेट स्तर पर 39 पदक अपने नाम कर चुकी हैं। पांच महत्वपूर्ण अवार्ड भी पा चुकी हैं।
अंतर राष्ट्रीय स्तर- 9 मेडल
राष्ट्रीय स्तर - 13 मेडल
स्टेट स्तर - 17 मेडल
अवार्ड
2008: उप्र केसरी अवार्ड
2010: उप्र केसरी अवार्ड
2012: अवध सम्मान
2015-16: लक्ष्मीबाई अवार्ड
2015: भारत केसरी