- छात्रा खुशी का कहना है कि बेटियों के घर के कामकाज तक ही सीमित न रखें, उनको उच्च शिक्षा दिलाएं। बेटियां अगर शिक्षित होंगी, तो वे आगे चलकर अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकेंगी। बेटियों में शिक्षा का अभाव होगा, तो उनका उत्पीड़न होता रहेगा।
- छात्रा आसिफा का कहना है कि छात्राओं को अपनी सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा के गुर अवश्य सीखने चाहिए। आत्मरक्षा के गुर सीखने से ही छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर डटकर मुकाबला कर सकती हैं। छात्राओं को रास्ते में कोई परेशान करें, तो इसकी जानकारी अपनी अध्यापिका और परिजनों को अवश्य दें।
- छात्रा सोफिया का कहना है कि कन्या भ्रूण हत्या एक महापाप है, इसके बावजूद भी कन्या भ्रूण हत्या की जा रही है। इस महापाप को रोकने के लिए समाज को सबसे पहले आगे आना होगा और इसके खिलाफ आवाज उठानी पड़ेगी। तभी जाकर यह महापाप बंद हो सकता है।
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- छात्रा अरीबा का कहना है कि अक्सर देखने को मिलता है कि बेटियों को हाईस्कूल या इंटरमीडिएट तक की शिक्षा दिलाकर समाज उनको आगे की शिक्षा ग्रहण नहीं कराते हैं। जबकि समाज के लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए। बेटियों को उच्च शिक्षा दिलानी चाहिए, वे भी शिक्षित होकर देश और समाज का नाम रोशन कर सकती हैं।
- छात्रा सिमरन का कहना है कि अतिरिक्त दहेज के लिए विवाहिता की हत्या कर दी जाती है। देश और प्रदेश में इस तरह की अधिकतर घटना घट रही हैं। समाज को अपनी सोच बदलकर दहेज प्रथा पर रोक लगानी चाहिए। इसके लिए समाज को आगे बढ़कर कदम उठाने होंगे।
- छात्रा संजना का कहना है कि बेटियों को लगन और मेहनत से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। छात्राओं को सशक्तीकरण के प्रति महिलाओं को जागरूक करना चाहिए। इसके लिए अपनी आसपास की महिलाओं से संपर्क करें और उनको सशक्तीकरण कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें।
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