खेड़ा गांव।
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...यहां हर घर में एक फौजी
गांव खेड़ा को शहीदों के गांव के नाम से भी जाना जाता है। अब तक गांव के पांच फौजी देश की सरहदों पर शहीद हो चुके हैं। 1999 में कारगिल युद्ध में दीपक कुमार, 2000 में मेजर दिग्विजय सिंह, 1965 की जंग में नायक रामदास और 1971 में रामपाल सिंह शहीद हुए। गांव के तकरीबन हर घर का एक युवा देश की सुरक्षा में तैनात है। गांव के दोनों मुख्य मार्गों पर शहीद द्वार बने हैं। एक मेजर दिग्विजय सिंह द्वार और एक शहीद दीपक कुमार द्वार बना है।