बच्चों के खानपान पर ध्यान दें
कुपोषित बच्चों के खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चों को अंकुरित चने, दूध, दही, रोटी, फल उसकी आयु वर्ग की कैलोरी के हिसाब से देने होंगे। यदि बच्चों के अधिक समय तक तेज बुखार, आंख लाल होना, हाथ-पैरों में सूजन, पेट संबंधी समस्या, शरीर पर चकते या लाल दाने होना आदि लक्षण मिलते हैं तो तत्काल चिकित्सकों की सलाह लेनी चाहिए। - डॉ. नवरतन, नोडल अधिकारी, पीआईसीयू, मेडिकल कॉलेज
यह है मेरठ की स्थिति
जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीत सिंह ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने 1,84,437 बच्चों का वजन लिया। इसमें 5239 कुपोषित, 1169 अति कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए हैं। अगर बच्चे की स्थिति ज्यादा खराब हो तो जिला मुख्यालय पर बने पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है। यहां बच्चे के पोषाहार के साथ तीमारदार के भोजन की भी व्यवस्था होती है। साथ ही 50 रुपये प्रतिदिन भत्ता भी दिया जाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाए
सामान्य वजन वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा कम है। अगर वह संक्रमित होते भी है तो जल्द ही रिकवर हो जाएंगे, लेकिन मध्यम कम वजन वाले और अति कम वजन के बच्चों में संक्रमण का ज्यादा खतरा होता है। इनमें से अति कम वजन वाले बच्चों को ज्यादा रिस्क माना जा रहा है। इनका ख्याल रखा जाए और इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। - डॉ. मोहम्मद अंजुम, बाल रोग विशेषज्ञ