डॉ. राजीव अग्रवाल, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और डॉ. संजीव सक्सेना, हृदय रोग विशेषज्ञ
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वेलेंटाइन डे पर अगर युवती आपका दिल तोड़ दे तो परेशान न हों, क्योंकि भविष्य में कोई और मिल सकता है। लेकिन हवा में घुल रहे जहर से सावधान हो जाएं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हवा में घुले पीएम 2.5 के हानिकारक कण दिल को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
हवा में बिखरे ये माइक्रो पॉल्यूटेंट्स हर उम्र में दिल को आघात दे रहे हैं, लेकिन चिकित्सकों के पास आने वाले दिल के मरीजों में युवाओं की संख्या अधिक है। फील्ड जॉब वाले युवाओं पर इसका ज्यादा असर हो रहा है। दिवाली के बाद एनसीआर सहित पश्चिमी यूपी के कई जिलों में प्रदूषण के कारण धुंध की मोटी परत छा जाती है, जिसमें भारी संख्या में पीएम 2.5 और पीएम 10 के कण होते हैं। जो सांस के जरिये सीधे दिल तक पहुंचकर उसे प्रभावित करते हैं। मेरठ कृषि और उद्योग दोनों ही लिहाज से प्रमुख शहर हैं। खेती में हानिकारक केमिकल का प्रयोग होता है जो हवा में घुलकर प्रदूषण फैलाते हैं।
आर्टिलरी में आने लगता है संकरापन
पीएम 2.5 के कारण कोरोनरी आर्टिलरी में संकरापन आने लगता है। पीएम के घातक कण आर्टिलरी के आसपास एकत्र होकर धीरे-धीरे जमने लगते हैं। इसकी वजह से धमनियों में रक्तप्रवाह की गति प्रभावित होती है। हृदय को पंपिंग के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। दिल को उचित ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और हृदयाघात होता है।
अनियमित दिनचर्या भी जिम्मेदार
युवाओं में बढ़ती दिल की बीमारियों का बड़ा कारण अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान है। लेट नाइट काम, दिनभर बैठकर काम करने के कारण युवाओं में खराब वसा बढ़ रही है। जो मोटापा, रक्तचाप को बढ़ाकर युवाओं को दिल का मरीज बना रही है। साथ ही अधिक नमक, अधिक चीनी के कारण बीपी बढ़ने, शराब का अधिक सेवन, व्यायाम न करना, जंक फूड, मसालेदार खाना, अधिक तैलीय खाने के कारण भी युवाओं का दिल कम उम्र में ही बीमार हो रहा है।
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