जिस जाति के ज्यादा सदस्य उसी का प्रत्याशी
पिछले दो चुनावों पर अगर नजर डालें तो 2010 में सबसे ज्यादा 10 जाट सदस्य थे, तो मनिंदरपाल सिंह प्रत्याशी बने। 2015 में गुर्जर सदस्यों की संख्या भी इतनी ही थी, तो गुर्जर प्रत्याशी मैदान में उतरे। इस बार भी यही समीकरण आ सकता है, लेकिन वर्ष 2000 में भाजपा ने ही इतिहास को पलट दिया था। मात्र एक वोट वैश्य बिरादरी की होने के बावजूद दयानंद गुप्ता को जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित कराया था।
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गुटबाजी की चर्चा
भाजपा में गुटबाजी चल रही है। सिवालखास विधानसभा में सक्रिय नेताओं के बीच गुटबाजी ज्यादा है। ऐसे में एक-दूसरे को मात देने के लिए एक गुट द्वारा पद को अनारक्षित कराने में पूरा जोर लगाया गया है। क्योंकि चर्चा ओबीसी या एससी महिला को लेकर थी। भाजपा के पास एससी महिला प्रत्याशी ढूंढना मुश्किल होता तो ओबीसी महिला सीट होने को लेकर ज्यादा संभावना जताई जा रही थी, लेकिन यहां अवरोही क्रम के बहाने एक गुट ने दूसरे को झटका दे दिया।
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