भीषण गर्मी के चलते पावर सिस्टम पर बढ़े अतिरिक्त लोड से होने वाले फॉल्ट रोकने के लिए पीवीवीएनएल ने अब सेना में इस्तेमाल होने वाले थर्मोविजन कैमरों का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। इनकी मदद से विभाग को विद्युत लाइनों, इंसुलेटरों, लाइन ज्वाइंट और ट्रांसफॉर्मर के साथ ही बिजलीघर यार्ड के तापमान का पता लग जाएगा। पावर सिस्टम के लिए खतरनाक होने जा रहे तापमान का पता लगते ही सिस्टम को दुरुस्त कर लिया जाएगा।
आमतौर पर सेना अंधेरे में निगरानी के लिए थर्मल इमेजिंग कैमरों का इस्तेमाल करती है। अब इन्हीं कैमरों की मदद से बिजली की लाइनों की भी निगरानी की जाएगी। इस तकनीक का इस्तेमाल ट्रांसमिशन लाइनों के लिए किया जा रहा है, लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में पीवीवीएनएल सबसे पहले इसका इस्तेमाल करने जा रहा है। कंपनी ने प्रयोग के तौर पर फिलहाल ट्रांसमिशन से दो थर्मोविजन कैमरे लिए हैं। इन कैमरों से सर्वाधिक तापमान का शिकार हो रहे शहर के रामलीला ग्राउंड और लेडीज पार्क बिजलीघर का तापमान मापना शुरू किया है। शुरुआती चरण में ही कंपनी को सफलता मिली है। खतरनाक स्तर से ज्यादा तापमान मिलने पर अधिकारियों ने लाइनों के ज्वाइंट, जर्जर तार, जंफर और ट्रांसफॉर्मरों को दुरुस्त कराना शुरू कर दिया है। सिस्टम दुरुस्ती के बाद फाल्ट का खतरा बहुत कम हो जाता है।
कैसे करता है काम
बिजली आपूर्ति के दौरान लोड बढ़ने, इंसुलेटर फेल होने या दूसरी तरह की तकनीकी गड़बड़ी के दौरान लाइन या ट्रांसफॉर्मर का तापमान अचानक बढ़ने लगता है। इससे लाइन पिघल जाती है और स्पार्किंग होने के बाद फॉल्ट हो जाता है। थर्मोविजन कैमरे तापमान को कैद कर स्क्रीन पर दिखा देते है और तारों में बढ़ते तापमान को रिकॉर्ड कर लेते हैं। यह कैमरे अलग-अलग तापमान को अलग-अलग रंगों से दर्शाते हैं। ठंडा हिस्सा नीला, तापमान बढ़ने के साथ नीले से नारंगी और अधिकतम तापमान पर लाल हिस्सा नजर आने लगता है। जब तापमान ज्यादा बढ़ा नजर आता है तो लाइन बंद कर उस हिस्से को दूसरी सप्लाई लाइन से जोड़कर गर्म हो रहे हिस्से को सही कर दिया जाता है। इससे लाइन पिघलने और ट्रांसफॉर्मर खराब होने से बच जाते हैं।
ट्रांसफॉर्मर फुंकने से बचने पर ही बचेंगे सौ करोड़
पश्चिमांचल में हर साल 50 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े ट्रांसफॉर्मर फूंक जाते हैं। इसके चलते विभाग का ट्रांसफॉर्मर मरम्मत में ही करीब 200 करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं। यदि इन कैमरों का सही तरीके से निरंतर प्रयोग किया जाए तो ये विभाग का आधा घाटा कम कर सकते हैं।
फिलहाल दो कैमरों से निगरानी शुरू
लाइन और ट्रांसफॉर्मर के फॉल्ट 70 डिग्री से ज्यादा तापमान के चलते होते हैं। थर्मोविजन कैमरों की मदद से तापमान मापकर फॉल्ट रोके जा सकते हैं। कंपनी इनका पहली बार प्रयोग कर रही है। इससे पहले इनका प्रयोग ट्रांसमिशन विभाग में किया जा रहा है। फिलहाल प्रयोग के तौर पर दो कैमरों से निगरानी शुरू हुई है।
- अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी पीवीवीएनएल