उन्होंने बताया कि कोरोना के बाद से हार्ट अटैक के मामले काफी बढ़ गए हैं। आए दिन स्वस्थ्य इंसान चलते-फिरते, बातचीत करते, व्यायाम करते अथवा समारोह में हार्ट अटैक पड़ने से मर रहे हैं।
डॉ. सुधीश कुमार ने बताया कि शरीर के अंदर जब कोई क्रिया अथवा प्रतिक्रिया होती है तो उससे संकेत मिलते हैं, मगर समझ में नहीं आते। ऐसा ही हार्ट अटैक पड़ने पर होता है मगर इंसान समझ नहीं पाता है। उन्होंने बताया विज्ञान में साबित हो चुका है कि इंसान को जब भी हार्ट अटैक पड़ता है, उससे 60 मिनट पहले शरीर से काफी कम मात्रा में ट्रोपोनिम हार्मोन (बायो मार्कर) निकलता है। ट्रोपोनिम हार्मोन हल्के पसीने के साथ आता है, जो पसीने के साथ ही सूख जाता है। ऐसे में यह समझना नामुमकिन है कि पसीने के साथ ट्रोपोनिम हार्मोन आया अथवा नहीं।
वर्तमान हालातों के चलते ट्रोपोनिम हार्मोन के निकलने का संकेत देने के बाबत नैनो कम्पोजिट (पॉलीडाइल मिथाइल सिलैन आदि) से टैटू बायो सेंसर ईजाद किया गया है। नैनो कम्पोजिट की डिजाइन इंसान अपने शरीर पर मनपसंद डिजाइन में लगवा सकता है। जैसे ही शरीर से ट्रोपोनिम हार्मोन निकलेगा वैसे ही टैटू का रंग बदल जाएगा, जिससे हार्ट अटैक पड़ने का संकेत मिलेगा। इसके बाद लोगों को अस्पताल पहुंचकर उपचार कराने के लिए 60 मिनट का समय मिलेगा और मरीज की जान बचाई जा सकेगी।
रिसर्च पेपर हुआ पब्लिक, अब ट्रायल की तैयारी
डॉ. सुधीश कुमार ने बताया कि बायो मार्कर (ट्रोपोनिम हार्मोन) के निकलने का संकेत देने वाले टैटू बायो सेंसर के शोध का पेपर जनरल में प्रकाशित हो चुका है, जिसे काफी सराहा गया है। इसका ट्रायल होना बाकी है, जिसके लिए नियमानुसार कार्यवाही की प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं।