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अमर उजाला खास रिपोर्ट: ऐतिहासिक शहर का ऐसा हाल, हर रोज जूझ रहे लोग, चौंका देंगे बढ़ते वाहनों के ये आंकड़े

Sat, 19 Aug 2023 03:12 PM IST
कपिल kapil राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ

सार

Amar Ujala Special Report : ऐतिहासिक शहर का ऐसा हाल हो गया है कि हर रोज लोगों को जाम से जूझना पड़ रहा है। वहीं, बढ़ते वाहनों का ये आंकड़ा आपको भी चौंका देगा।
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मेरठ में जाम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ शहर की सड़कें हर साल बढ़ती आबादी और वाहनों के बोझ से दब रही हैं। भारी ट्रैफिक के चलते जाम से जूझना अब लोगों के रोजमर्रा का हिस्सा बन गया है। बावजूद इसके इस समस्या के समाधान के लिए किए जाने वाले उपाय पिछले पांच सालों में भी पूरे नहीं हो सके। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान में शहर की सड़कों पर 1.50 लाख वाहनों का दबाव है। सालाना लगभग 18 से 20 हजार नए वाहन सड़कों पर उतरते हैं। आरटीओ विभाग के अनुसार, पिछले पांच साल में शहर के भीतर 9483 ई-रिक्शा, 15 हजार से अधिक बाइक व स्कूटी और 63448 हजार कारों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। इन स्थितियों में चरमरा चुकी शहर के ट्रैफिक सिस्टम के लिए अभी तक ई-रिक्शा और थ्री-व्हीलर का रूट तक तय नहीं हुआ।

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सबसे ज्यादा जाम वाले क्षेत्र
हापुड़ अड्डा चौराहा, सोहराब गेट रोडवेज बस अड्डा, इंदिरा चौक, तेजगढ़ी, मेडिकल कॉलेज के बाहर, एल ब्लॉक शास्त्रीनगर तिराहा, गोलाकुआं, भुमियापुल, मेट्रो प्लाजा चौराहा, ट्रांसपोर्ट नगर थाने के पास, मलियाना फ्लाईओवर के नीचे, रेलवे रोड चौराहा, घंटाघर पालिका मार्केट, कचहरी पूर्वी और पश्चिम गेट, कमिश्नर आवास चौराहा, कंकरखेड़ा शिव चौक, मोदीपुरम फ्लाईओवर पर हर समय जाम लगा रहता है।

शहर में दौड़ रहे 9483 ई-रिक्शा, रूट तय नहीं
अपने वाहनों के अलावा शहर के भीतर लोगों के आवागमन का एक मात्र साधन बन चुके 9483 ई-रिक्शा शहर की सड़कों में दौड़ रहे हैं। वर्ष 2022 में ही 3230 ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन हुआ है। बेतरतीब तरीके से दौड़ते इतने ई-रिक्शा जाम का सबसे बड़ा कारण हैं, लेकिन इनका अभी तक रूट निर्धारित नहीं हुआ है।

टूटी सड़कें और अतिक्रमण भी बड़ी वजह
शहर की टूटी सड़कें और अतिक्रमण भी जाम का मुख्य कारण है। इसके लिए जिम्मेदार नगर निगम न तो महानगर की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करा सका न ही सड़कें बनवा सका। शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए निगम के पास अतिक्रमण दस्ता भी है। इसमें सेवानिवृत्त सैनिकों की भर्ती की गई है। इनके वेतन और गाड़ी में ही प्रतिमाह लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन अतिक्रमण दस्ते का असर शहर में नहीं दिखता।

खाली पड़े रहते बस स्टॉप, नहीं रुकतीं बसें
शहर के यातायात सुधार के लिए नगर निगम ने शहर में लगभग 24 स्थानों पर बस स्टॉप बनाए थे। लेकिन कुछ दिन बाद ही ये बस स्टॉप वीरान हो गए। चालकों ने मनमर्जी से सड़कों पर बसों को रोककर यात्रियों को बैठाना और उतारना शुरू कर दिया।

2018 में पंजीकृत वाहनों की संख्या
ई-रिक्शा-   1048
थ्री व्हीलर - 558
कार -    10464

वर्ष 2019 में रजिस्टर्ड हुए वाहनों की संख्या
ई-रिक्शा  - 216
थ्री व्हीलर - 754
कार      - 10276

वर्ष 2020 में रजिस्टर्ड हुए वाहनों की संख्या
ई-रिक्शा   - 948
थ्री व्हीलर - 262
कार       - 9015

वर्ष 2021 में रजिस्टर्ड हुए वाहनों की संख्या
ई-रिक्शा  - 1598
थ्री व्हीलर - 106
कार      - 10970

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वर्ष 2022 में रजिस्टर्ड हुए वाहनों की संख्या
ई-रिक्शा  - 3230
थ्री व्हीलर - 190
कार      - 13445

वर्ष 2023 में रजिस्टर्ड हुए वाहनों की संख्या
ई-रिक्शा   -2443
थ्री व्हीलर - 162
कार        - 9278

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समाधान जो नहीं हो सके
- इनर रिंग रोड का निर्माण पिछले 20 सालों में भी पूरा नहीं
- जुर्रानपुर फाटक के पास रेलवे लाइन के ऊपर लटका आरओबी
- तीन साल से लिंक रोड का निर्माण भी नहीं शुरू हुआ।
- गोलाकुआं से भुमिलयापुल मार्ग का निर्माण कार्य छह साल बाद भी शुरू नहीं हुआ।
- जिला अस्पताल मार्ग भी पिछले डेढ़ साल से निर्माण की बाट जोह रहा।
- बढ़ता गया अतिक्रमण, संकरी हो गईं सड़कें।
- ई-रिक्शा और थ्री व्हीलर के लिए निर्धारित नहीं हो सके स्टैंड।

शहर की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। उसी के तहत वाहनों का रजिस्ट्रेशन भी बढ़ रहा है। विभाग में हर साल 15 हजार से अधिक वाहन रजिस्टर्ड हो रहे हैं। इसके अलावा शहर की सड़कों पर तमाम ऐसे वाहन हैं जो हमारे यहां रजिस्टर्ड नहीं हैं। - कुलदीप सिंह, एआरटीओ
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