ऐसे में सरकारी विभागों पर विद्युत निगम मेहरबान है। यदि इन विभागों से ही वह वसूली कर ले तो दो करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व एक साथ मिल सकता है। मगर सरकार की सख्ती का असर आम उपभोक्ताओं तक ही नजर आता है।
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प्रमुख सरकारी विभागों में बिजली बकाया स्थिति
स्वास्थ्य विभाग 92 लाख रुपये
नगर विकास 03 लाख रुपये
परिवहन विभाग 03 लाख रुपये
राजस्व विभाग 13 लाख रुपये
कृषि विभाग 03 लाख रुपये
कृषि विपणन 12 लाख रुपये
अन्य विभाग 52 लाख रुपये
-विद्युत निगम के अनुसार सितंबर तक अनुमानित बकाया
पहले कोरोना काल, फिर हड़ताल का रहा असर
विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता पंकज श्रीवास्तव कहते हैं कि पहले कोरोना काल और इसके बाद कर्मचारियों की हड़ताल के कारण चेकिंग और बकाया बिल वसूली का अभियान पिछड़ गया। इसमें फिर से तेजी लाकर राजस्व वसूली बढ़ाई जाएगी। सरकारी विभागों में बजट और बिल पास होने की तकनीकी अड़चनें भी आती रहती हैं। इन्हें भी दूर कराने का प्रयास जारी है।
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