यांत्रिकी खंड के पत्र ने खोली पोल
जल निगम के यांत्रिकी खंड ने पांच नवंबर को नगर निगम के जीएम जलकल को पत्र भेजकर उन ओवरहेड टैंकों की सूची मांगी थी, जिनकी सफाई एक साल में की गई है। निगम ने सूची उपलब्ध नहीं कराई। इससे प्रतीत हो रहा है कि शहरवासियों को सफाई किए बिना ही ओवरहेड टैंकों से पानी दिया जा रहा है।
फैल सकती हैं संक्रामक बीमारियां
टैंकों की सफाई नहीं होने से जलाशयों में फोकल कोलीफॉम नामक बैक्टीरिया उत्पन्न हो जाते हैं, जिसके चलते नलकूपों पर क्लोरीन की ओवर डोजिंग करनी पड़ती है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। वहीं, ये बैक्टीरिया संक्रामक बीमारियों का कारण बनते हैं।
निगम का पानी प्रयोग करना छोड़ा
जल निगम के पत्र में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष आचार्य डॉ. वाचस्पति मिश्र का हवाला दिया गया है। जागृति विहार सेक्टर-4 निवासी डॉ. मिश्र का कहना है कि पिछले साल ओवरहैड टैंक से मरा हुआ बंदर मिला था। इसके बाद से उन्होंने टैंक का पानी पीना बंद कर दिया। अब वह अपने सबमर्सिबल का पानी पी रहे हैं।
प्लांट 14 से शुरू होने में संदेह
गंगनहर चालू होने में अब केवल पांच दिन शेष हैं। 14 नवंबर की आधी रात से गंगनहर चालू हो जाएगी। इसके दो दिन बाद गंगाजल भोला झाल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच जाएगा लेकिन तब तक प्लांट चालू नहीं हो सकेगा। कारण, तीन नवंबर की शाम से शुरू प्लांट की सफाई अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। उधर, डीएम का प्लांट चालू करने का 15 दिन का अल्टीमेटम 18 नवंबर को खत्म होगा।
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