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यूपी चुनाव: रालोद-सपा ने चलने शुरू किए दांव, इन दो सीटों पर दावा ठोकेगा लोकदल, पढ़िए खास रिपोर्ट

Sun, 28 Feb 2021 01:44 PM IST
कपिल kapil प्रदीप मिश्र, अमर उजाला, मेरठ
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जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला
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चुनावी गठबंधन के बावजूद रालोद-सपा 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले ही अपने-अपने दांव चल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 23 मार्च को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभियान शुरू करने से पूर्व रालोद ने हस्तिनापुर क्षेत्र में किसान महापंचायत कर सीट पर अपने दावे की बुनियाद रख दी है। पार्टी की नजर सरधना सीट पर भी है। हस्तिनापुर सीट पर बसपा से निष्कासन के बाद सपा में शामिल योगेश वर्मा यहां से प्रमुख दावेदार हैं। अखिलेश के कार्यक्रम का जिम्मा भी योगेश ने ही लिया है। क्षेत्र के एंची खुर्द गांव निवासी अधिवक्ता ओमकार सिंह तोमर की आत्महत्या के मामले में नामजद दिनेश खटीक क्षेत्र से भाजपा के विधायक हैं।

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रालोद ने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी की किसान महापंचायत के लिए भैंसा गांव को रणनीति के तहत चुना है। पार्टी का शहरी क्षेत्र में आने वाले तीनों विधानसभा क्षेत्रों में नहीं के बराबर असर है। यही नहीं, मेरठ शहर सीट से रफीक अंसारी सपा से विधायक हैं। शहर और गांवों की मिली-जुली सीट सिवालखास सीट पर रालोद का प्रभाव हर चुनाव में देखा गया है। 2012 और 2017 में इस सीट से रालोद के क्षेत्रीय अध्यक्ष चौधरी यशवीर सिंह चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार यहां से सपा के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने आवेदन किया है। 

वहीं दूसरी तरफ बदले माहौल में रालोद मेरठ से कम से कम दो सीटें चाहता है। इसलिए हस्तिनापुर और सरधना सीट पर दावे का माहौल बनाना शुरू कर दिया है। रालोद को पता है कि किठौर से पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर और सरधना से पूर्व प्रत्याशी अतुल प्रधान का टिकट कटवाना आसान नहीं है। इसलिए सिवाल खास के बाद हस्तिनापुर सीट के वह सपा पर दबाव बनाएगी। अगर सपा ने राजपाल को सिवालखास से मैदान में उतारा तो सपा सरधना के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। हस्तिनापुर में जहां भाकियू का प्रभाव ज्यादा है, वहीं सरधना सीट पर 2012 में रालोद की टिकट पर हाजी याकूब कुरैशी को मिले 50 हजार मत और 2017 में बसपा से लड़े उनके बेट हाजी इमरान कुरैशी को मिले 97 हजार वोट उसके दावे का आधार बनेंगे। फिलहाल, याकूब परिवार की बसपा से दूरी है। हालांकि हस्तिनापुर सीट से रालोद (तब जनता दल) के झग्गड़ सिंह 1989 में आखिरी बार चुनाव जीते थे। 
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दूसरी ओर रालोद की रणनीति से योगेश वर्मा खेमे में खलबली मच गई है। अखिलेश के नजदीकी अतुल ने पुरानी राजनीतिक दुश्मनी को दरकिनार और अन्य दावेदारों को समायोजन का आश्वासन देकर हाल ही में योगेश को सपा में शामिल कराया है। 
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दरअसल, अतुल को सरधना में दलित समुदाय के वोटों की जरूरत है। वहीं टिकट की उम्मीद में ही योगेश ने 23 मार्च को अखिलेश की जनसभा कराने का एलान किया है। जनसभा के लिए अतुल मेरठ ही नहीं, सहारनपुर, मुरादाबाद, आगरा और अलीगढ़ में भी जनसंपर्क कर रहे हैं।

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