लेखपाल की रिपोर्ट से सामने आई 1954 के बाद की सच्चाई
अभिलेखों से पता चला कि 31 अक्तूबर, 1954 को तत्कालीन तहसीलदार ने भट्टा खिश्त की इस जमीन को श्रेणी 15-3 के तहत मानते हुए ग्राम समाज में दर्ज करने का आदेश दिया था। अब यह क्षेत्र नगर निगम में है। बाद में तत्कालीन लेखपाल ने जालसाजी कर खतौनी में निजी व्यक्तियों के नाम अंकित कर दिए। अधिग्रहण के बाद इन व्यक्तियों के परिजनों ने मुआवजा भी ले लिया। मौजूदा लेखपाल ने रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया कि सिर्फ खसरा नंबर 327 और 328 ही नहीं, खसरा नंबर 329, 330 और 331 भी भट्टा खिश्त के नंबर है। लेखपाल ने खसरा नंबर 327 व 328 को नगर निगम में दर्ज कराने का अनुरोध किया है।
डीएम को सौंप दी है जांच रिपोर्ट
जांच कराई थी और रिपोर्ट जिलाधिकारी को दे दी है। जिलाधिकारी द्वारा जांच रिपोर्ट के परीक्षण उपरांत प्राप्त आदेश पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
- संदीप भागिया, एसडीएम, सदर
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