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कोरोना काल में बड़ा बदलाव, अब गांवों में मंडी बना रहे बासमती के निर्यातक, पढ़िए एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

Fri, 04 Sep 2020 11:37 AM IST
कपिल kapil मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ
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बासमती चावल - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना काल में सब कुछ बदल रहा है। मंडी में किसानों की आवक भी कम हो गई है। ऐसे में बासमती के निर्यातकों ने किसानों को सुविधा देने के लिए उनके गांव में ही मंडी स्थापित करने की घोषणा की है। बुलंदशहर के अरनिया गांव से इसकी शुरुआत भी होने वाली है। इसका सीधा-सीधा लाभ किसानों को होगा। वे मंडी में होने वाली घटतौली, ट्रांसपोर्ट खर्च और मंडी शुल्क से बच सकेंगे।

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पश्चिमी उप्र में बासमती बहुतायत में पैदा किया जाता है। निर्यातक भी यहां के किसानों से सीधे धान खरीदना चाहते हैं। जिससे किसानों और निर्यातकों दोनों को लाभ हो। इसी के तहत एक निर्यातक ने बुलंदशहर के अरनिया में फॉच्यून एग्रोमार्ट फर्म के नाम से मंडी की घोषणा की है। यहां से सभी प्रमुख निर्यातक माल खरीद सकेंगे। कई अन्य निर्यातक भी मेरठ व आसापास के जिलों में ऐसी मंडियां बनाने पर विचार कर रहे हैं। यहां किसानों को अपने उत्पाद का अच्छा दाम मिल सकेगा। 

किसानों को कर रहे जागरूक
मोदीपुरम स्थित बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि कोरोना काल में केंद्र सरकार ने भी निर्यातकों को सीधे किसानों से उपज खरीदने की छूट दी है। संस्थान ने भी बीज बिक्री के लिए यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, जम्मू कश्मीर व उत्तराखंड तक के किसानों को जोड़ने के लिए क्लब बनाया था। इससे सभी किसानों तक आसानी से बीज पहुंच गया। 
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यूपी से शुरुआत की है
कोरोना के कारण निर्यातक सीधे किसानों से बासमती लेंगे। यूपी से इसकी शुरुआत की गई है। एक निर्यातक ने बुलंदशहर में प्राइवेट मंडी की घोषणा की है। अन्य जिलों में भी इसी तरह से काम किया जाएगा। इस शुरुआत से कोरोना काल में किसानों को राहत मिलेगी। उनका काफी खर्च बच जाएगा। - डॉ. रितेश शर्मा, प्रभारी, बीईडीएफ

सही मूल्य मिल सकेगा
किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सकेगा। निर्यातक अच्छी गुणवत्ता का चावल सीधे किसानों से खरीद सकेंगे। मंडी में होने वाली मिलावट व अन्य खर्चों से बचा जा सकेगा। - अजय भलोटिया, उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर एसोसिएशन

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