शीशी खुलने के चार घंटे बाद बेकार हो जाती है डोज
बड़ौत सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि कोवैक्सीन के एक शीशी में 20 डोज रहती हैँ। यानी एक शीशी से 20 लोगों को टीके लगाए जाते हैं। शीशी के एक बार खुलने के बाद उसे चार घंटे में खत्म करना होता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो डोज बेकार हो जाती है। शिविर में लोग काफी कम संख्या में पहुंच रहे हैं। बताया कि कोविशील्ड की एक शीशी में 10 डोज रहते हैं, जिस कारण यह बहुत कम खराब हो रही है।
जागरूकता से थम गई थी वैक्सीन की बर्बादी
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में आठ सीएचसी, 23 पीएचसी और एक जिला अस्पताल है। सरकार की ओर से पहले कोवैक्सीन की शीशी दी जा रही थी। शुरुआत में जागरूकता कम होने के चलते लोग कम पहुंच रहे थे, इससे कोवैक्सीन की बर्बादी बढ़ गई थी। इसलिए सरकार ने इस बर्बादी केे थामने के लिए पांच से 10 लोगों को लगाने वाली शीशी की सप्लाई शुरू दी। इससे इसकी बर्बादी थम गई। लेकिन अब ज्यादा से ज्यादा लोग वैक्सीन लगवा सके, इसके तहत सरकार की ओर से फिर से 20 लोगों को वैक्सीन लगाने वाली शीशी की सप्लाई शुरू कर दी गई है। ऐसे में इसकी बर्बादी फिर से बढ़ने लगी है।
कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका लगाने का अभियान चलाया है। हर जगह दोनों वैक्सीन उपलब्ध हैं, लेकिन कम संख्या में लोग कैंपों में पहुंच रहे हैं। नतीजतन प्रत्येक सीएचसी पर चार से पांच कोवैक्सीन का डोज खराब हो रही है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में कैंप में पहुंचने का आह्वान किया। - डॉ. दीपा सिंह, डीआईओ।