प्रधानों से कहा जा रहा है कि भुगतान करो। प्रधान और सचिव को इसमें कुछ लाभ नहीं दिख रहा। वे न बिल पर हस्ताक्षर करने को तैयार हैं, न ही भुगतान करने के लिए। मुख्यमंत्री के एक दो जगह डीपीआरओ के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश देने पर प्रधान और सचिव और सचेत हो गए हैं।
प्रधान तो बच ही रहे हैं अब तो सचिव भी उन्हें फोन कर कह रहे हैं कि बिल पर हस्ताक्षर मत कर देना। हस्ताक्षर किए तो फंस जाओगे। अधिकारियों के रवैये से प्रधान और सचिव डरे हैं। मजे की बात यह है कि ये उपकरण प्रधानों को मिले ही नहीं और उनसे भुगतान की बात की जा रही है। उन्हें कहा जा रहा है कि ये खरीद कर उनके क्षेत्र की आंगनबाड़ी केे दे दिए गए हैं।
ग्राम विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष मुनेंद्र सिंह का कहना है कि कुछ विकास खंडों में थर्मामीटर, स्केनर और ओक्सोमीटर जिला स्तर पर खरीद कर बिल भिजवा दिए गए हैं। उनके विकास खंड में अभी कोई बिल नहीं मिला है।
डीपीआरओ सतीश कुमार का कहना है कि थर्मामीटर, स्केनर और ओक्सोमीटर का भुगतान प्रधानों को करना है। जिलास्तर से कोई खरीद नहीं हुई। वहीं, अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संघ जिलाध्यक्ष मुकेश दहिया के अनुसार कोरोना व डेंगू के नाम पर ग्राम पंचायत सचिव घोटाला कर रहे हैं।
सचिवों के रवैये से जिले के ज्यादातर ग्राम प्रधान परेशान हैं। प्रधानों के बाकी कराए गए काम का तो भुगतान अब तक नहीं हुआ है। ऑक्सीमीटर की खरीद प्रधानों ने नहीं की है, उनके ऊपर भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
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