फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कृषि विधेयकों से किसान आंदोलन में सुलगी चिंगारी

विज्ञापन
विज्ञापन
कृषि विधेयकों से किसान आंदोलन में सुलगी चिंगारी
विज्ञापन

मेरठ। कृषि विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार को हुए चक्का जाम में तमाम किसान संगठनों के एक मंच पर आकर विरोध करना किसान राजनीति के लिए एक अच्छा संकेत हैं। संगठनों ने एकजुटता का परिचय तो दिया गया है, लेकिन संगठन नेताओं का मनभेद दूर करना किसान आंदोलन की सफलता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
वहीं आगामी गन्ना सीजन के लिए किसानों ने अभी से आस्तीनें चढ़ानी शुरू कर दी है। पश्चिमी यूपी के किसानों का कहना है कि पिछले दो साल गन्ने का रेट न बढ़ाकर चीनी उद्योग को फायदा पहुंचाने वाली प्रदेश सरकार ने अगर इस साल रेट नहीं बढ़ाया और मिल समय से चालू नहीं कराई तो किसान आंदोलन की आग भड़केेगी।
विज्ञापन

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बाद बाबा महेंद्र सिंह टिकैत ही ऐसे किसान नेता रहे है जिन पर किसानों न केवल विश्वास किया बल्कि उनकी एक आवाज पर लाखों किसान अपना काम छोड़कर दौड़े चले आया करते थे, लेकिन उनके निधन के बाद से किसान आंदोलन में अब वो धार नहीं है जब किसानों के कूच की खबर से जिला प्रशासन और सरकारें तक हिल जाया करती थी।
किसान अब जातियों और राजनीतिक दलों के बीच बंट गया है। लेकिन तीन कृषि विधेयकों ने किसान आंदोलन को फिर से जिंदा कर दिया है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे किसान बाहुल्य राज्यों में पिछले कई दिन से किसान सड़कों पर उतरे हैं। सड़क और रेल यातायात बाधित किया हुआ है। शुक्रवार को किसान संगठनों के चक्का जाम में भीड़ अपेक्षा से कम थी। इसे पश्चिमी यूपी में गन्ना बेल्ट होने से भी जोड़कर देखा जा सकता है। गन्ने की खरीद एमएसपी और एक सिस्टम के तहत होने के चलते यहां के किसान विधेयकों से ज्यादा प्रभावित नहीं हो रहे हैं।
गन्ने का रेट नहीं बढ़ने पर तेज होगा आंदोलन
गन्ने की बेल्ट के किसान अपनी फसलों के प्रति बेहद संजीदा और संवेदनशील हैं। आगामी सीजन में सरकार ने अगर गन्ने के दाम नहीं बढ़ाए और मिलों को समय से चालू कराने के साथ ही पिछला बकाया भुगतान नहीं कराया तो यहां पर किसान आंदोलन गरमाएगा।
किसान सड़क पर आंदोलन करेंगे
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत का कहना है कि किसान संगठनों ने एकजुट होकर देशभर में चक्का जाम कर सरकार को दिखा दिया है कि किसान अपना डेथ वारंट नहीं निकलने देगा। सरकार को ये काला कानून वापस लेना होगा। गन्ने का रेट नहीं बढ़ने, बढ़ी बिजली दरें वापस नहीं होने और समय से मिल नहीं चलने पर किसान सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। -
गांवों के बाहर लगेंगे भाजपा नेताओं का आना मना के बोर्ड : वीएम सिंह
मेरठ। कृषि विधेयकों के विरोध में देशभर के किसान आंदोलन कर रहे हैं। अमरोहा क्षेत्र के कई गांवों के किसानों ने गांवों के बाहर भाजपा नेताओं का आना मना है के बोर्ड लगा दिए हैं। यह कहना है अखिल भारतीय संयुक्त किसान संघर्ष समिति के संयोजक सरदार वीएम सिंह का। उन्होंने शनिवार को अमर उजाला के साथ खास बातचीत की।
वीएम सिंह ने बताया कि 28 सितंबर को शहीद भगत सिंह की जयंती है। इस दिन किसान कृषि विधेयकों के खिलाफ आरपार की लड़ाई का संकल्प लेंगे और गांवों के बाहर अमरोहा के गांवों की तरह बोर्ड लगाएंगे।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आने वाले समय में एमएसपी और मंडी को खत्म कर किसानों को कारपोरेट के सामने मरने के लिए छोड़ने वाली है। लेकिन किसान अपने हक ओर हकूक के लिए पूरी ताकत से लड़ेंगे। चक्का जाम तो बानगी भर है। आगे इससे भी बड़े आंदोलन होंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें