फिलहाल इतना तो तय है कि मेरठ नजदीक होने के कारण वहां से किताबों की सप्लाई बड़े स्तर पर जिले में होती है। हालांकि बुक सेलर व स्कूल संचालक एनसीईआरटी की किताबों की सप्लाई दिल्ली से होना बता रहे हैं। बुक सेलर अनिल कुमार ने बताया कि एनसीईआरटी की सभी किताबें दिल्ली से सप्लाई होती है। वहीं से किताबें मंगाई जाती है। स्कॉटिश इंटरनेशनल स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी प्रदीप त्यागी ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबें दिल्ली से आती है।
असली-नकली किताबों में अंतर
असली किताबों में हर पेज पर वाटर मार्क से एनसीईआरटी लिखा होता है। जबकि नकली किताबों में ऐसा कुछ नहीं होता। असली किताबों के पेज चिकने और चमकदार होते है जबकि नकली किताबों में कागज हल्का और सादा लगा होता है।
डिमांड पूरी न होने का उठाते हैं फायदा
एनसीईआरटी की किताबों की सप्लाई और मांग में बड़ा अंतर होता है। जरूरत से कम सप्लाई होने का फायदा उठाकर इस धंधे से जुड़े लोग नकली किताबें सप्लाई कर देते हैं। अभिभावक और छात्र इस बात से अनजान रहते हैं और वे सिर्फ किताबें खरीदने तक ही सीमित रह जाते हैं।
किताब विक्रेताओं के यहां पहले भी कई बार किताबों की जांच की जा चुकी है। जिले में यूपी बोर्ड या एनसीईआरटी की किताबों का प्रकाशन नहीं होता। मेरठ में नकली किताबें मिलने का मामला जानकारी में आया है। इसे लेकर दुकानों पर किताबों की जांच की जाएगी। - सरदार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक।