सुनील पाल के अपहरण कांड की जीरो एफआईआर मुंबई में दर्ज करने के बाद मेरठ में स्थानांतरित की गई थी। खुलासे के लिए एसएसपी ने पुलिस की दस टीमें गठित की थीं। एसओजी और सर्विलांस टीम को भी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगाया गया था। आरोपियों पर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया था। इन टीमों में शामिल लगभग 60 पुलिसकर्मी कई राज्य और शहरों में दबिश देते रहे।
सर्विलांस की मदद से आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास करते रहे लेकिन केवल एक आरोपी अर्जुन कर्णवाल को गिरफ्तार कर पाई। जबकि बिजनौर पुलिस ने मास्टर माइंड 50 हजार के इनामी लवी पाल समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद ही एसएसपी ने एसओजी को भंग किया।
एसओजी में प्रभारी अरुण मिश्रा समेत 15 पुलिसकर्मी शामिल हैं। सर्विलांस टीम में चार पुलिसकर्मी और शेष आठ टीमों में लगभग 40 पुलिसकर्मी हैं। इसी गिरोह ने अभिनेता मुश्ताक मोहम्मद खान का अपहरण किया था। जिसकी रिपोर्ट बिजनौर में दर्ज हुई थी। बिजनौर पुलिस लगातार आरोपियों को गिरफ्तार करती रही।
अपहरण कांड से फिर उठी पुलिस कमिश्नरेट की मांग
सुनील पाल अपहरण केस के बाद मेरठ में पुलिस कमिश्नरेट की मांग एक बार फिर से उठने लगी हैं। आरोपियों ने जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया। सुनील पाल को क्षेत्र की सड़कों पर अगवा कर घुमाया और फिरौती वसूली। इससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
सदर बाजार थाना प्रभारी शशांक त्रिवेदी को एसएसआई बनाया
एसएसपी ने सदर बाजार क्षेत्र में अपराधियों के बेलगाम होने पर थाना प्रभारी शशांक त्रिवेदी को हटाकर सरधना थाने का एसएसआई बना दिया। इसके अलावा भी महकमे में कई अन्य बदलाव भी एसएसपी ने किए हैं। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा का कहना है कि रूटीन में कई पुलिसकर्मियों को इधर से उधर किया गया है।