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Meerut News: बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई, 8.20 लाख की वसूली करेगा विभाग

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मेरठ। जनपद को बाल श्रम मुक्त बनाने के संकल्प को दोहराते हुए जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में जिला टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। इसमें बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम-1986 के तहत वर्ष 2024-25 और 2025-26 में की गई कार्रवाई की गहन समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने बाल श्रम को लेकर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
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जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने बैठक में बताया कि वर्ष 2024-25 में 350 प्रतिष्ठानों और 2025-26 में 150 प्रतिष्ठानों पर निरीक्षकों द्वारा कार्रवाई की गई है। बाल श्रमिकों का नियोजन करने वाले 415 नियोक्ताओं के विरुद्ध चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष अभियोजन दायर किए जा चुके हैं, जबकि शेष मामलों में कार्रवाई जारी है। इसके अतिरिक्त बाल श्रमिक नियोजन करने वाले 34 प्रतिष्ठानों से 8.20 लाख की धनराशि वसूलने के लिए वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी किए गए हैं। इनमें से दो लाख की वसूली पहले हो चुकी है। जिलाधिकारी ने शेष राशि की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करने के लिए श्रम प्रवर्तन अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से संबंधित तहसीलदारों से संपर्क करने और 15 दिनों के भीतर वसूली की कार्यवाही पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को मुक्त कराए गए बच्चों के शैक्षिक पुनर्वास की जिम्मेदारी सौंपी गई। बैठक में एडीएम सिटी बृजेश सिंह, सहायक श्रमायुक्त, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सभी श्रम प्रवर्तन अधिकारी, सीओ, एएचटीयू टीम व बाल श्रम उन्मूलन में सक्रिय स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
समन्वित प्रयासों की आवश्यकता

जिलाधिकारी ने टास्क फोर्स के सभी शासकीय विभागों और स्वयंसेवी संस्था को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनपद में बाल श्रम के उन्मूलन और मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास की कार्यवाही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने श्रम विभाग के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने और सभी विभागों व गैर-सरकारी संगठनों को मिलकर काम करने का आह्वान किया। ताकि मेरठ को जल्द से जल्द बाल श्रम मुक्त जनपद घोषित किया जा सके।
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