दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर हादसा।
- फोटो : amar ujala
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर गुरुवार को पहले ही दिन वाहन आपस में भिड़ गए। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची है। बताया गया कि एक गाड़ी में ड्राइवर अंदर फंसा हुआ है। जिसे निकालने के लिए पुलिस प्रयास में जुटी है।
पुलिस के अनुसार डायवर्जन होने के कारण यह हादसा हुआ है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के गर्डर रखने के कारण डायवर्जन की व्यवस्था पहले दिन ही दिन फेल हो गई। सवाल है कि जब गर्डर रखे जाने थे तो एक्सप्रेस-वे क्यों खोला गया।
आज ही हुई हाईवे की शुरुआत
तीन वर्ष एक महीने के इंतजार के बाद मेरठवासियों को आज दिल्ली आने-जाने के लिए एक्सप्रेसवे की सौगात मिल गई। उद्घाटन की औपचारिकताओं के बगैर मेरठ से दिल्ली तक 82 किलोमीटर का सफर आसान हो गया है। अहम बात यह है कि एक्सप्रेसवे पर टोल दरें तय होने में एक सप्ताह लग सकता है।
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मेरठ के यात्री परतापुर से डासना तक का सफर मात्र 25 मिनट में पूरा कर सकेंगे, जबकि दिल्ली-मेरठ के बीच की यात्रा 45 मिनट में पूरी हो सकेगी। यात्रियों को मोदीनगर और मुरादनगर में रोजाना लगने वाले जाम से भी निजात मिलेगी। दिल्ली-मेरठ की दूरी को कम करने के लिए 2008 में मंथन शुरू हुआ था। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने पर दिसंबर, 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी। पहले प्रोजेक्ट को नवंबर 2019 में पूरा किया जाना था लेकिन तकनीकी कारणों और फिर कोरोना महामारी के चलते प्रोजेक्ट की समयसीमा करीब डेढ़ साल बढ़ गई। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने फेसबुक के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को इसके लिए धन्यवाद दिया है।
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