नूर मोहम्मद के बेटे राशिद की बरात बुधवार को मेरठ जानी थी। शुक्रवार को छोटे बेटे की बरात मुजफ्फरनगर जानी थी। शनिवार को बेटी गुलफ्शा की शादी थी। तमाम रिश्तेदार तीनों शादी में शामिल होने के लिए आए हुए थे।
दोपहर के समय सभी लोग शाम को बरात में जाने की तैयारी कर रहे थे। तभी गंगनहर में फैजान और शावेज के डूबने की सूचना मिली तो खुशी का माहौल मातम में बदल गया।
शादी में शामिल होने आए तमाम रिश्तेदार देर रात तक नहर पर डटे रहे। परिजन स्थानीय गोताखारों की मदद से लगातार सर्च अभियान चलाते रहे। करीब पचास लोगों ने नहर में जाल लगाकर सर्च अभियान चलाया। बृहस्पतिवार को शावेज का शव बरामद हो गया।
नहर में था कम पानी, अंदाजा नहीं था डूब जाएंगे
बुधवार को गंगनहर में पानी कम था। पांचों युवक चलकर दूसरे किनारे जाने लगे। अल्तमश अकेला तैर रहा था। फैजान, शावेज, समीर और इरफान एक-दूसरे का हाथ थामे हुए थे।
तभी उन्हें अचानक लगा कि पानी ज्यादा है, वह डूब सकते हैं। चारों के हाथ छूट गए। अल्तमश, समीर और इरफान को लोगों ने किसी तरह बाहर निकाल लिया, जबकि शावेज और फैजान पानी में समा गए।
दो मासूम बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
शावेज के परिजनों बताया कि छह साल पहले उसकी शादी अलकमा से हुई थी। एक बेटी चार वर्षीय अलसिबा और दूसरी छह माह की फातिमा है। कोरोना काल में शावेज के पिता मुस्तकीम की मौत हो गई थी। अभी इस गम को परिजन भुला भी नहीं पाए थे कि शावेज के डूबने से एक बार फिर परिवार पर गम का पहाड़ टूट पड़ा।
बेटी को गोद में लेकर नहर किनारे बैठी रहीं अलकमा
शावेज की पत्नी अलकमा चार साल की बेटी अलसिबा व छह माह की दूसरी बेटी फातिमा को गोद में लेकर गंगनहर के किनारे बेसुध होकर बैठी रही। नहर की तरफ नजर टिकाए रखी। अलकमा की हालत देख सभी की आंखें नम हो गईं।