रविवार रात करीब आठ बजे पुलिस आप नेता के घर पहुंच गई। परिजनों से बात हुई तो उन्होंने कोई भी जानकारी न होने की बात कही। इसके बाद घर के बाहर पुलिस बिठा दी गई। रात 11 बजे तक पुलिस ने कई चक्कर आप नेता के घर के लगा लिए। तमाम कोशिश के बाद भी जब अंकुश चौधरी हाथ नहीं लगे तो पुलिस उनके भाई व आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. विकास चौधरी को पूछताछ के बहाने थाने लेकर आई और नजरबंद कर दिया।
पिता पहुंचे तो उन्हें अंकुश चौधरी को लाने व डॉ. विकास को ले जाने की बात कहकर लौटा दिया गया। राजनीतिक उत्पीड़न ही कहा जायेगा कि केवल भाई के विपक्ष की राजनीति करने का खामियाजा डॉ. विकास को भुगतना पड़ा और रात थाने में गुजारनी पड़ी। सुबह होते ही मामला तूल पकड़ गया।
मेरा शहर, मेरी पहल के विपुल सिंघल सहित कई संगठनों के लोग थाने पहुंच गए और पुलिस उत्पीड़न का विरोध जता दिया। अफसरों के फ़ोन घनघनाने लगे। मामला बिगड़ता देख पुलिस बैकफुट पर आ गई और डॉ. विकास चौधरी को छोड़ दिया गया।
यही नहीं डॉ.विकास से पुलिस ने कोई उत्पीड़न न किये जाने का पत्र भी लिखवा लिया। इंस्पेक्टर गंगानगर ऋषिपाल सिंह ने हिरासत में रखने के आरोप को गलत बताया है। उनका कहना है कि केवल रात व सुबह डॉ. विकास को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पूरा मामला अफसरों के संज्ञान में है।