बिजौली गांव में शुरुआत में एक अब छह तख्त निकाले गए
धार्मिक आस्था एवं सांप्रदायिक एकता की मिसाल है बिजौली की होली
अमर उजाला ब्यूरो
खरखौदा। मेरठ जिले के गांव बिजौली में ऐतिहासिक होली मनाई जाती है। यहां रंग खेलने के बाद गांव तथा क्षेत्र को आपदा से बचाने के लिए विभिन्न मोहल्ले से युवकों को नुकीले औजारों से बेधकर तख्त निकाले जाते हैं। इस वर्ष अलग-अलग मोहल्लों से छह तख्त निकाले गए। इस त्योहार पर दूर-दूर से लोग आते हैं। यह प्रथा हिंदू-मुस्लिम एकता को संजोये हैं।
गांव बिजौली में करीब 700 वर्ष पूर्व सूखा, महामारी, अकाल, अतिवृष्टि सरीखी आपदा आने पर राजा विजय सिंह ने यहां आए गंगापुरी नामक महात्मा से बचाव का उपाय पूछा। इस पर महात्मा ने पूरे गांव से तख्त निकालने की सलाह दी। जिसमें तख्त सवार युवकों के मुंह आदि से नुकीले औजारों को आरपार निकाला गया। इसके बाद तख्त को बैंड-बाजों के साथ गांव में घूमाया गया। यात्रा के आगे गांव के युवक लठबाजी एवं तलवारबाजी का प्रदर्शन करते हैं। यात्रा पूरी होने के बाद तख्त पर सवार युवकों के घावों को पर होली की राख लगाई गई। ग्रामीण इसी प्रथा को आज भी कायम रखे हुए हैं। अब गांव से एक तख्त न निकालकर प्रत्येक मोहल्ले से तख्त निकाला जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि एक बार इस प्रथा को छोड़ दिया तो गांव तथा आसपास के क्षेत्र को फिर आपदा ने घेर लिया।
छह तख्त निकाले गए
इस वर्ष भी प्रथा को आगे बढ़ाते हुए मोहल्ला चौक से गुरुदत्त त्यागी के आवास से तख्त निकाला गया। जिसमें डैनी त्यागी, संदीप व गोलू त्यागी को नुकीले औजारों से बेधा गया। दूसरा तख्त गोला कुआं से वीरेंद्र शर्मा के आवास से निकाला गया। इस पर कुलदीप, बिरजू जाटव व अश्विनी गिरी सवार रहे। तीसरा तख्त खेड़े वाले महेश चंद त्यागी के आवास निकाला गया। इस पर राहुल त्यागी, लीलू त्यागी व प्रशांत त्यागी सवार रहे। चौथे तख्त पर महिपाल, राजवीर व सचिन त्यागी को बेधा गया। पांचवां तख्त जाटव समाज द्वारा ईश्वर के आवास से निकाला गया। इस पर धीरज वाल्मीकि, मोनू व राजवीर सवार रहे। छठा तख्त मोहल्ला पछायला अज्जू त्यागी के आवास से निकाला गया। इस पर नीटू, संदीप एवं बिट्टू रहे।
हिंदू एवं मुस्लिम का सहयोग
होली से 15 दिन पहले इसकी तैयारी की जाती है। गांव का एक मुस्लिम परिवार इस दौरान प्रयोग होने वाले औजार तैयार करता है। हालांकि अब औजार युवकों के आरपार करने का कार्य अन्य ग्रामीण करते हैं। तख्त निकालने के दौरान बैंड-बाजों के साथ गांव के युवक लाठी-डंडे, तलवार व अन्य धारदार हथियार लेकर चलते हैं। तख्त को पूरे गांव में घूमाने के बाद युवक बाबा गंगापुरी की समाधि पर जाते हैं।
कुछ है असली, कुछ नकली
युवकों के शरीर बेधने से पहले होली की राख लपेटी जाती है। फिर युवकों के मुंह, बाजू तथा पेट की त्वचा के आर पार औजार निकाले जाते हैं। इस दौरान एक तलवार युवक के आरपार दिखाई दी है। यह सत्य नहीं है तलवार दो हिस्सों में होती है। तलवार का एक हिस्सा आगे तथा पीछे हिस्सा का हिस्सा बेल्ट में फंसाया गया था।
भारी भरकम चढ़ावा
इस प्रथा की बहुत मान्यता है। गांव बिजौली के ग्रामीण और उनके रिश्तेदार तथा आसपास के गांवों के लोग तख्त देखने आते हैं। तख्त के नीचे से नवजात को निकालकर आशीर्वाद लिया जाता है। तख्त पर नकदी, गुड़, कपड़ा, चादर एवं साड़ी आदि का चढ़ावा आता है। तख्त निकालने के बाद गुड़ के प्रसाद को पूरे गांव में बांटा जाता है। एकत्र कपड़े एवं साड़ी आदि गरीब की लड़की की शादी में दिए जाते हैं।
नहीं होता है इंफेक्शन
युवकों को नुकीले औजारों से बेधा जाता है। तख्त यात्रा समाप्त होने के बाद उनके घावों पर होली की राख लगाई जाती है। मान्यता है कि आज तक न तो उन घावों में कोई इंफेक्शन हुआ और न ही शरीर पर कोई निशान रहता है।
युवकों में लगती है होड़
तख्त पर सवार होने के लिए युवकों में होड़ लगती है। एक बार बिंधने वाले युवक को जोड़ा पूरा करना होता है।
दो वर्ष पहले हो चुका है बवाल
दो वर्ष पहले तख्त निकालने को लेकर जाटव एवं त्यागी समाज में बवाल हुआ था। इस दौरान दोनों पक्षों में जमकर पथराव एवं फायरिंग हुई थी। जिस कारण इस वर्ष एसपी देहात ने यात्रा से पहले दो बार गांव में फ्लैग मार्च निकाला तथा यात्रा के दौरान भारी मात्रा में पुलिस बल मौजूद रहा।