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Meerut News: 210 करोड़ जीएसटी बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन ....

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चुनाव परिचर्चा...210 करोड़ जीएसटी देने के बाद भी ज्वैलरी पार्क बना है सपना
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- बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन वर्ष 2020 से कर रहा है फैक्ट्री फ्लेटेड कांप्लेक्स की मांग
- सराफ व्यापारी बोले राजनैतिक दल अपने घोषणा पत्र में शामिल करें ज्वैलरी पार्क

आशुतोष भारद्वाज
मेरठ।

स्वर्णनगरी मेरठ के आभूषण समूचे विश्व में पसंद किए जाते हैं। इस व्यवसाय से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1.50 लाख लोग जुड़े हैं। आभूषण निर्माण में 35 हजार कारोबारी और कारीगर हैं। वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार सराफा कारोबार 210 करोड़ जीएसटी देता है। इसके बाद भी चार वर्ष से चली आ रही सराफा कारोबारियों की ज्वैलरी पार्क और फैक्ट्री फ्लेटेड कांप्लेक्स की मांग अधूरी हैं। लोकसभा चुनाव में सराफ व्यापारी भी इस मुद्दे को मजबूती से उठा रहे हैं। बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन की तरफ प्रदेश और केंद्र सरकार को ज्ञापन देकर अवगत कराया गया है। इसी विषय को लेकर शहर सराफा बाजार में सराफा व्यापारियों की अमर उजाला के साथ चर्चा हुई।
बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन के महामंत्री विजय आनंद अग्रवाल ने बताया कि मेरठ सराफा बाजार सालाना 7 हजार करोड़ का कारोबार करता है। 755 इकाईयां हैं जो एमएसएमई में रजिस्टर्ड हैं। भारतीय मानक ब्योरो में 1560 ईकाई रजिस्टर्ड हैं। आयकर देने में भी सराफा बाजार अग्रणी हैं। अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि ज्वैलरी पार्क के आने से कारोबार चार गुना हो जाएगा। इसके साथ ही जीएसटी की भी वृद्धि होगी। संदीप अग्रवाल ने बताया वेदव्यासपुरी में बनने से ही स्थान पर हर कार्य संभव हो जाएगा। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से भी यह उचित रहेगा। परिचर्चा में संदीप अग्रवाल, राज किशोर रस्तौगी, अमित अग्रवाल, दीपक जौहरी, आशीष कौशिक, दीपक कंसल मौजूद रहे।
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फैक्ट्री फ्लेटेड कांप्लेक्स के लाभ...
संभावित टर्नओवर: 21 हजार करोड़

संभावित जीएसटी: 650 करोड़
प्रत्यक्ष रोजगार: 50 हजार

स्किल्ड लेबर: 10 हजार
सराफा बाजार की वर्तमान स्थिति...

कारीगर: 30 हजार
दुकानदार: 2 हजार

सप्लायर्स : 2 हजार
थोक विक्रेता: 200

कारोबार: 7 हजार करोड़ सालाना
जीएसटी: 210 करोड़

फैक्ट्री फ्लेटेड कांप्लेक्स से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु...
- वेदव्यासपुरी में 40 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल बनेगा।

- एक छत के नीच हीरा, सोना और चांदी के आभूषण बनेंगे।
- ज्वैलरी का सीधा इंपोर्ट और एक्सपोर्ट कर पाएंगे।

- ज्वैलरी पार्क में प्रदर्शनी भी लगाने की व्यवस्था होगी।
- मॉर्डन आभूषण भी बनाना हो पाएगा संभव।

- कारीगरों के लिए ट्रेनिंग सेंटर भी उपलब्ध होगा।
- कॉमन फैसेलिटी सेंटर में मिलेंगी आधुनिक मशीनें।

यह बोले सराफ व्यापारी....
- सराफ व्यापार को मिलेगी गति

- सराफा बाजार के व्यापार को एक नई गति देगा

फैक्ट्री फ्लैट्टेड कंपलेक्स बनने के साथ ही मेरठ को एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के साथ भी जोड़ा जाए। यहां पर एक उसका ऑफिस बनाया जाए, जिससे ऑर्गेनाइज्ड रूप से हम बुलियन और सराफा का व्यापार कर सकें। नई पीढ़ी को नई दिशा मिलेगी और व्यापार को नई गति मिलेगी।- डॉक्टर संजीव अग्रवाल, अध्यक्ष, नील गली व्यापार संघ।

- ज्वैलरी पार्क करेगा बुनियादी ढांचे को मजबूत

- मेरठ का आभूषण बाजार मेकिंग के कारण पूरी दुनिया में पहचाना जाता है। असंगठित बाजार और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण इसका असर बाजार पर बड़े पैमाने पर पड़ रहा है। यदि आभूषण पार्क आता है तो हम सभी एकजुट होकर काम कर सकते हैं। बंगाली कारीगरों के साथ आने वाली दैनिक चुनौतियों से निपट सकते हैं। सराफा उद्योग में 1 लाख से अधिक लोग शामिल हैं। जो किसी भी राजनीतिक दल के लिए एक बड़ा वोट बैंक बनाता है। यदि हमें लाभ मिलता है तो यह उनके लिए एक बड़ा वोट होगा।- विपुल अग्रवाल, डिजलिंग डायमंड।

- चुनाव में अहम मुद्दा है ज्वैलरी पार्क

- जिस प्रकार से मेरठ में ज्वैलरी कारोबार है। फैक्ट्री फ्लैटेड कांप्लेक्स और ज्वैलरी पार्क तो पहले से ही बनना चाहिए था। यह इस चुनाव में अहम मुद्दा रहेगा। देश के सराफा व्यापारी मेरठ की ही ज्वैलरी पसंद करते हैं। मेरठ में ज्वैलरी पार्क कारोबार चार गुना हो जाएगा।- दिनेश कुमार रस्तोगी, महामंत्री, सराफ व्यापार एसोसिएशन।
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- प्रोसेस केंद्रित बनाया जाए पार्क

- आभूषण विशिष्ठ औद्योगिक एस्टेट की स्थापना से औद्योगिक इकाइयां योजनाबद्ध तरीके से सम्मिलित हो सके।- आशुतोष अग्रवाल, डायरेक्ट इंडियन बुलियन ट्रेड कॉरपोरेशन।
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