बिजनौर। विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट अवधेश कुमार ने दलित युवक मोनू की हत्या में पांच लोगों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व 62-62 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता शलभ शर्मा के अनुसार थाना नगीना देहात के गांव लखमनपुर निवासी करन ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 27 दिसंबर 2011 को सुबह नौ बजे उसके पुत्र दीपक के साथ नगीना-लखमनपुर सड़क पर रतन ने जातिसूचक शब्दों से गालियां देते हुए उसके साथ मारपीट की थी। थोड़ी देर बाद रतन उसके भाई पवन, चमन ने उसकी मोटरसाइकिल रोककर दीपक के साथ मारपीट की और जातिसूचक शब्दों के साथ अपमानित किया। इसकी तहरीर मेडिकल रिपोर्ट के साथ थाने में दी गई थी। इस रंजिश की वजह से 29 दिसंबर 2011 को शाम पांच बजे रतन, पवन, मदन, चमन हाथों में तमंचे लेकर उसके घर आए और उसके पुत्र दीपक, भतीजे मोनू को जान से मारने के लिए उनपर गोली चला दी। रतन का फायर मिस हो गया। मदन के तमंचे से निकली गोली मोनू को लगी। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे नगीना अस्पताल लाया गया और जहां से बिजनौर और फिर मेरठ रेफर कर दिया गया। बाद में इलाज के दौरान मोनू की मौत हो गई।
पुलिस ने मदन एवं रतन के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त तमंचे बरामद किए थे। इस हत्याकांड की रिपोर्ट रतनपाल, मदनपाल, पवन कुमार, चमन पुत्रगण विजयपाल सिंह चौहान एवं सूरज सचदेवा निवासी नगीना के विरुद्ध दर्ज कराई गई थी। इस मामले में अदालत ने पांचों को मोनू की हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा रतनपाल, मदनपाल को अवैध शस्त्र रखने में भी अलग से तीन-तीन वर्ष के कारावास व आठ-आठ हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।