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55 बाजारों को चाहिए अपनी पार्किंग

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55 बाजारों में पार्किंग की आवश्यकता
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मेरठ। मेट्रो या रैपिड ट्रेन के प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा तो शहर की यातायात व्यवस्था कैसे सुचारू होगी। क्या शहर केचौराहे ट्रैफिक का लोड झेलने को तैयार हैं। ऐसी ही जिज्ञासाओं को लेकर योजना के साथ एमडीए सभागार में प्रजेंटेशेन हुआ। दिल्ली की एक कंसल्टेंसी ने अपना प्लान पेश किया पर तमाम सवालों का कोई निदान नहीं निकला। सबसे बड़ा सवाल आया कि शहर में 55 बाजार हैं। उनकेलिए पार्किंग कहां और कैसे बनेगी।
बृहस्पतिवार को एमडीए सभागार में यूएमटीसी कंसल्टेंसी ने मेरठ की यातायात व्यवस्था पर प्रजेंटेशन दिया। इस मौके पर शहर में रैपिड तथा मेट्रो जैसे दो अहम प्रोजेक्ट पर मंथन हुआ। बाकायदा मुख्य सचिव इस बाबत निर्देश दे चुके हैं कि वर्ष 2024 तक इस पर काम पूरा किया जाए। मेट्रो और रैपिड दोनों की डीपीआर बन रही है। कहा गया है कि आवास विकास विभाग इसी वर्ष जुलाई माह से इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करेगा। यदि साल के अंत तक भी इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया तो क्या यहां इस तरह की योजना है जो ट्रैफिक सिस्टम पर लागू की जा सके। बैठक में एसोसिएट प्लानर केवी शुक्ला, नगर नियोजक केके गौतम, चीफ इंजीनियर नगर निगम केबी वार्ष्णेय, सीओ ट्रैफिक संजीव देशवाल, टीएसआई दीनदयाल दीक्षित समेत एमडीए तथा अन्य विभागों के तमाम अधिकारी मौजूद रहे।
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केवल चौराहे डेवलेप करने से नहीं चलेगा काम
चूंकि प्रोजेक्ट पर काम शुरू होते ही सारा ट्रैफिक सिस्टम गड़बड़ा जाएगा। सीआरआरआई भी आठ चौराहों को तो डेवलेप करने का प्लान कर चुकी है पर उन बाजारों का क्या जहां पार्किंग बनानी है। शहर में सबसे बड़ी समस्या पार्किंग न होना है। वीसी साहब सिंह ने कहा कि शहर में 55 बाजार ऐसे चिह्नित किए गए हैं जहां वास्तव में तत्काल ही पार्किंग बननी चाहिए। इस बाबत न मेट्रो के थ्योरटिकल सर्वे में सही जिक्र है न ही अन्य प्रजेंटेशन में।

अधिग्रहण की रकम कितनी
मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण करना होगा। न ही सर्वे में और न ही प्रशासनिक आधार पर अभी यह स्थिति साफ हो पाई है कि कितना मुआवजा देना होगा। कितनी जमीन अधिग्रहीत होगी। यहां 14 स्टेशन ऐसे हैं जहां प्रशासन के पास अपनी जमीन नहीं है। यहां अधिग्रहण करना होगा।
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बस अड्डे बाहर जाएंगे
वीसी ने स्पष्ट कहा कि बस अड्डों को बाहर जाना ही है। ऐेसे में मेट्रो के लिए चल रहे सर्वे में यह बात भी साफ हो कि इन बस अड्डों को कहा भेजा जाए। इसके लिए जमीन का इंतजाम करना होगा। रैपिड और मेट्रो के प्रोजेक्ट पर काम शुरू होते ही तो बस अड्डों को बाहर भेजना ही होगा।

खास बात
ट्रैफिक सिस्टम के लिए दिल्ली की एक कंसल्टेंसी ने दिया प्रजेंटेशन, पर नहीं निकल सका निदान
मेट्रो तथा रैपिड पर हुआ काम शुरू तो ट्रैफिक का कैसे लोड उठा सकेंगे मेरठ के चौराहे तथा बाजार
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