फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बच्चों पर भीषण गर्मी की मार, बच्चा वार्ड में बेड फुल

विज्ञापन
विज्ञापन
बच्चों पर भीषण गर्मी की मार, बच्चा वार्ड में बेड फुल
विज्ञापन

सरकारी अस्पतालों में एक-एक बेड पर दो-दो बच्चे भी किए जा रहे भर्ती
जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोज आ रहे
600 से अधिक बच्चे
मेरठ। गर्मी की मार से बच्चे बेहाल हैं। वह उल्टी, दस्त और बुखार की चपेट में आ रहे हैं। इससे शरीर में पानी की कमी हो रही है। ज्यादा ठंडा पानी पीने से खांसी की शिकायत भी हो रही है। आलम यह है कि मेडिकल, जिला अस्पताल में हर रोज 600 से ज्यादा बच्चे ओपीडी में आ रहे हैं। बच्चा वार्ड में बेड फुल हो गए हैं। मजबूरी में एक बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं।
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में 18 बेड हैं, जो फुल रहते हैं। इनके अलावा बच्चों की संख्या ज्यादा होने पर बच्चों को पुरुष सर्जिकल वार्ड में भी खाली बेड़ों पर शिफ्ट किया गया है। मेडिकल कॉलेज में 70 से ज्यादा बच्चे भर्ती हैं। इनमें 15 बच्चे नर्सरी वार्ड में हैं। चिकित्सक बताते हैं कि बच्चों की प्रतिरक्षण प्रणाली ज्यादा मजबूत नहीं होती है, लिहाजा इस मौसम में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है, ताकि बच्चा स्वस्थ रहे। गर्मियों के दिनों में बच्चों की पाचन शक्ति अक्सर कमजोर हो जाती है। लिहाजा बच्चों को हल्का तथा पौष्टिक भोजन ही देना चाहिए। साथ ही उन्हें ठंडे और गर्म चीजों का सेवन एक साथ न करने दें। मौसम के अनुकूल फलों का सेवन कराएं। तरबूज, लीची, आम और जामुन जैसे फल खाने को दें। बीमार होने पर बच्चों का घरेलू उपचार करने में सावधानी बरतें।
विज्ञापन

यह बरतें सावधानी
गर्मी में बच्चों को बाहर जाने से रोकें।
पानी की कमी लगी तो ओआरएस का घोल पिलाएं।
गरिष्ठ और पुरानी फ्रीज में रखा खाना न खिलाएं।
दोबारा गर्म कर बासी खाने को न दें।
छह माह तक के बच्चे को मां का दूध ही पिलाएं।
बच्चे के बीमार होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
बढ़ रही बच्चों की तादाद
गर्मी की वजह से बच्चों की ओपीडी में बढ़ोतरी हुई है, जहां पहले 200 बच्चे आ रहे थे, वहां अब इनकी तादाद 300 के पार पहुंच रही है, जो लगातार बढ़ती जा रही है। - डॉ. विजय जायसवाल, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन

बढ़ती जा रही ओपीडी
गर्मी का असर बच्चों पर काफी दिख रहा है। शून्य से 10 साल तक की उम्र तक के ज्यादा पीड़ित हो रहे हैं। ओपीडी पहले से काफी बढ़ गई है। पहले ओपीडी में 150 तक आते थे, अब 200 से 300 तक आ रहे हैं। - डॉ. श्रीओम, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें