भगवान जिनेंद्र की स्तुति से रोग और भय से मुक्ति
हस्तिनापुर। प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे शांतिनाथ विधान के 18वें दिन मुख्य मंदिर में सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर भगवान का अभिषेक किया। इसके पश्चात सभी श्रद्धालु विधान स्थल पर पहुंचे जहां पर भगवान की प्रतिमा को सौधर्म इंद्र पांडुक शिला पर विराजमान किया गया। इसके बाद शांतिधारा की बोली प्रारम्भ हुई।
आज की शांतिधारा करने का सौभाग्य प्रमोद जैन सुरेश जैन, सुबोध जैन, प्रवेश जैन, आदि, नमन, रोनित, शौर्य को प्राप्त हुआ। क्षेत्र में विराजमान भावभूषण जी महाराज ने कहा कि- हे गुणसागर प्रभु! आपके चन्द्र समान उज्ज्वल गुणों को बृहस्पति के समान बुद्धिमान विद्वान भी अपनी बुद्धि से आपके गुणों का वर्णन नहीं कर सकता है। जैसे की प्रलय काल की वायु से उद्वेलित मगरमच्छों से भरे समुद्र को कौन व्यक्ति अपनी भुजाओं से पार कर सकता है अर्थात कोई भी नहीं। ऐसे जिनेन्द्र भगवान की जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा व भक्ति से स्तुति करता है। पूजन, विधान, जाप करता है तो उसके बात पित्त रूप सभी जनित रोग मिट जाते हैं। आज सभी भक्तों ने भगवान अनंतनाथ की पूजा कर भगवान का जन्म, तप कल्याणक धूमधाम से मनाया। रात्रि में आयोजित हो रहे सांस्कृतिक प्रश्न मंच कार्यक्रम में पुरस्कार हिमांशी जैन के जन्मदिन पर सुमत प्रकाश जैन, उत्तर प्रांतीय गुरुकुल, हस्तिनापुर वालों ने बांटे तथा विधान की मांगलिक क्रियाएं आगमोक्त विधि विधान के साथ शुद्ध मंत्रोच्चार पूर्वक द्वय युवा विद्वान पं. आशीष जैन शास्त्री इस कार्यक्रम को संपन्न करा रहे हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन, उपाध्यक्ष जीवेंद्र कुमार, मंत्री शिखरचंद जैन, मंत्री प्रद्युम्न कुमार, मुकेश जैन (महाप्रबंधक), उपप्रबंधक अशोक कुमार, उमेश, अतुल, मणिचंद, कमल, सुदर्शन, दीपक जैन आदि का सहयोग रहा।