छात्रों ने बनाया व्हाट्सएप ग्रुप परिजनों को जोड़ा
यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है, जिसमें उन्होंने अपने परिजनों को भी जोड़ा है। इसमें वे अपने पल-पल की जानकारी वीडियो और ऑडियो मेसेज के जरिए शेयर कर रहे हैं।
मलियाना निवासी प्रियांशु प्रभाकर का यूक्रेन के सिटी मैकोलिव से आज सुबह वीडियो शेयर किया जिसमें वह बेसमेंट में छात्रों की हालत बयां कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां सोने तक की जगह नहीं है, खाने पीने के लिए छात्रों के पास कुछ नहीं बचा है। बम धमाकों की आवाजें आ रहीं हैं। रोमानिया-यूक्रेन बॉर्डर पर रातभर माइनस 6 से 10 डिग्री तापमान में रहे। उन्होंने सभी छात्रों को बॉर्डर पर पहुंचाने की अपील की है।
रोहटा रोड निवासी स्नेहाशीष भी इन्हीं छात्रों के साथ फंसे हैं। जहां करीब दो हजार से ज्यादा छात्र एकत्रित हैं। न पानी, न खाना और न ही ठंड से बचने के लिए कपड़े हैं।
पिता संतु मालाकर ने बताया एंबेसी से कहा गया था कि कोई सामान नहीं लाना है। पिता ने कहा जब इंतजाम नहीं तो छात्रों को बॉर्डर पर पहुंचने के लिए नहीं कहना चाहिए था। बेटे ने बताया कि सुबह में गेट खुला तो भगदड़ मच गई, कई छात्रों के चोट आई हैं। परिवार के लोग रातभर नहीं सो पाए हैं।
यूक्रेन से बॉर्डर के लिए निकले जनपद बिजनौर के मेडिकल छात्रों ने पूरी रात खुले आसमान के नीचे कड़ाके की ठंड में गुजारी। आज सुबह रोमानिया में प्रवेश किया। पहले सीमा में मेडिकल छात्राओं को लिया गया। फ्लाइट कब मिलेगी, अभी भी संशय की स्थिति बनी हुई है। वहीं छात्र छात्राओं के अभिभावक परेशान हैं। छात्रों ने यह भी खबर दी है कि बॉर्डर पर नाइजीरियन छात्रों ने भारतीय छात्रों को रोका, पहले अपने देश के छात्रों को एंट्री देने पर अड़ गए।