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मुश्किल में जान: न खाना पानी, ठंड में गुजारी रात, यूक्रेन-रोमानिया के बॉर्डर पर फंसे 1500 भारतीय छात्र-छात्राएं, स्नेहाशीष ने बयां किए आज के हाल

Sun, 27 Feb 2022 11:31 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क अमर उजाला, मेरठ

सार

यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है, जिसमें उन्होंने अपने परिजनों को भी जोड़ा है। इसमें वे अपने पल-पल की जानकारी वीडियो और ऑडियो मेसेज के जरिए शेयर कर रहे हैं। 
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ukraine - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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माइनस पांच डिग्री सेल्सियस पारा और आगे जाने की कोई व्यवस्था नहीं। यूक्रेन-रोमानिया के बॉर्डर पर भारत के करीब 1500 छात्र-छात्राएं फंसे हुए हैं। पिछले 12 घंटे से रोमानिया में प्रवेश नहीं मिल रहा है। यूक्रेन में फंसे मेरठ के स्नेहाशीष ने वहां के हालात की जानकारी देते हुए शनिवार रात करीब साढ़े 12 बजे परिजनों को एक वीडियो भेजा है। यह वीडियो आने के बाद छात्रों के परिजनों ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों को सकुशल भारत लाने की मांग की है। 

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ये छात्र शनिवार को बस पर तिरंगा झंडे लगाकर यूक्रेन से रोमानिया के लिए रवाना हुए थे। मेरठ के रोहटा रोड सरस्वती विहार निवासी स्नेहाशीष मालाकर, यूक्रेन के इवानो फ्रेंकिवस्क मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के प्रथम वर्ष के छात्र हैं। दो दिन से हॉस्टल में फंसे हुए थे। उनके साथ मेरठ के घंटाघर निवासी जसीम भी है। स्नेहाशीष ने इसके वीडियो और फोटो शेयर किए हैं।

पिता संतु मालाकर ने बताया कि पोलैंड, रोमानिया व हंगरी के रास्तों में भारत सहित अन्य देशों के छात्र निकल रहे हैं। इससे जाम लगा हुआ है और छात्रों को रोमानिया पहुंचने में परेशानी हो रही है। बेटे स्नेहाशीष ने बस से रवाना होने के दौरान एक ऑडियो मेसेज छोड़ा। भारतीय समयानुसार देर रात करीब साढ़े 12 बजे स्नेहाशीष का वीडियो आने के बाद परिवार की नींद उड़ी हुई है।

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छात्रों ने बनाया व्हाट्सएप ग्रुप परिजनों को जोड़ा 
यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है, जिसमें उन्होंने अपने परिजनों को भी जोड़ा है। इसमें वे अपने पल-पल की जानकारी वीडियो और ऑडियो मेसेज के जरिए शेयर कर रहे हैं। 

मलियाना निवासी प्रियांशु प्रभाकर का यूक्रेन के सिटी मैकोलिव से आज सुबह वीडियो शेयर किया जिसमें वह बेसमेंट में छात्रों की हालत बयां कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां सोने तक की जगह नहीं है, खाने पीने के लिए छात्रों के पास कुछ नहीं बचा है। बम धमाकों की आवाजें आ रहीं हैं। रोमानिया-यूक्रेन बॉर्डर पर रातभर माइनस 6 से 10 डिग्री तापमान में रहे। उन्होंने सभी छात्रों को बॉर्डर पर पहुंचाने की अपील की है।

रोहटा रोड निवासी स्नेहाशीष भी इन्हीं छात्रों के साथ फंसे हैं। जहां करीब दो हजार से ज्यादा छात्र एकत्रित हैं। न पानी, न खाना और न ही ठंड से बचने के लिए कपड़े हैं। 

पिता संतु मालाकर ने बताया एंबेसी से कहा गया था कि कोई सामान नहीं लाना है। पिता ने कहा जब इंतजाम नहीं तो छात्रों को बॉर्डर पर पहुंचने के लिए नहीं कहना चाहिए था। बेटे ने बताया कि सुबह में गेट खुला तो  भगदड़ मच गई, कई छात्रों के चोट आई हैं। परिवार के लोग रातभर नहीं सो पाए हैं।

यूक्रेन से बॉर्डर के लिए निकले जनपद बिजनौर के मेडिकल छात्रों ने पूरी रात खुले आसमान के नीचे कड़ाके की ठंड में गुजारी। आज सुबह रोमानिया में प्रवेश किया। पहले सीमा में मेडिकल छात्राओं को लिया गया। फ्लाइट कब मिलेगी, अभी भी संशय की स्थिति बनी हुई है। वहीं छात्र छात्राओं के अभिभावक परेशान हैं। छात्रों ने यह भी खबर दी है कि बॉर्डर पर नाइजीरियन छात्रों ने भारतीय छात्रों को रोका, पहले अपने देश के छात्रों को एंट्री देने पर अड़ गए।
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