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उच्च रक्तचाप में भी दी जा सकती हैं बीटा ब्लॉकर

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मेरठ। बीटा ब्लॉकर दवाइयां उच्च रक्तचाप में भी दे सकते हैं। इसका कोई नुकसान नहीं होता है। यह अमेरिकन पद्धति में साबित हो गया है कि इससे साइड इफेक्ट नहीं होता है, बल्कि यह नसों के जो छोटे-छोटे ब्लॉक बन जाते हैं, वह भी खत्म कर हार्ट अटैक के रिस्क को कम कर देती है। यह कहना है पोलैंड वॉरसॉ से आए प्रोफेसर डॉ. बिगन्यू गैसिऔंग का। वह सोमवार देर शाम एनएच-58 बाईपास स्थित गॉडविन होटल में हुए सेमिनार में मुख्य अतिथि थे।
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विषय था ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उच्च रक्तचाप में बीटा ब्लॉकर का इस्तेमाल’। उन्होंने चिकित्सकों को बीटा ब्लॉकर दवाओं के संबंध में टिप्स दिए और भ्रांतियां दूर कीं। इसे उन्होंने प्रोजेक्टर के जरिए भी समझाया। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (एपीआई) की मेरठ शाखा के अध्यक्ष डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि बीटा ब्लॉकर्स रोगी के पूरे शरीर पर अलग-अलग तरह से असर करती हैं। ये दवाइयां हृदय के मरीजों में, सीने में दर्द, उच्च रक्तचाप, असामान्य हृदय की धड़कन और हृदय विफलता में प्रयोग की जाती हैं। हालांकि 60 साल से ज्यादा उम्र के मरीज को बीटा ब्लॉकर देने से बचना चाहिए। इस दौरान डॉ. अधीप मित्रा, डॉ. विनीत बंसल, डॉ. अमिताभ गौतम, डॉ. राकेश ऐरन, डॉ. प्रवीण शर्मा, डॉ. प्रशांत बेंद्रे, जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. पीके बंसल समेत 100 से ज्यादा चिकित्सक मौजूद रहे। इसके अलावा एमडी मेडिसिन कर रहे काफी स्टूडेंट्स भी पहुंचे।
ऐसे काम करती है बीटा ब्लॉकर
यह धड़कनों की तेज दर को कम कर देती है। इससे बायां वेंट्रिकल ज्यादा अच्छे से रक्त को आगे पंप करने के लिए भर जाता है। इसके अलावा कुछ दवाइयां शरीर की रक्त वाहिकाओं को भी चौड़ा कर उनमें खून के प्रवाह को आसान कर देती हैं।
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खास बातें
- पोलैंड से पहुंचे प्रोफेसर डॉ. बिगन्यू गैसिऔंग ने चिकित्सकों को दिए टिप्स
- हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव अग्रवाल समेत काफी चिकित्सक रहे मौजूद
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