लकड़ी या कोयले से जलती भट्ठियों में तैयार होता मावा अब बीते जमाने की बात हो गई है। पर्यावरण प्रदूषण फैलाता भट्ठियों से निकलता काला धुआं, पसीने से तर-ब-तर कारीगर कुछ इस तरह का नजारा मावा तैयार करने वालों का रहता है, लेकिन अब मावा भूनने बनाने के लिए इस तरह के झंझट से छुटकारा मिलेगा। मामाल यूपी में मेरठ जिले के सरूरपुर थाना क्षेत्र का है।
बॉयलर के माध्यम से अब पर्यावरण में फैलने वाले धुएं से छुटकारा दिलाया जाएगा। इससे यहां बिन आग के भाप की भट्ठियों पर मावा बनता दिखेगा। बॉयलर की भट्ठी से तैयार मावा एवं मिठाई की गुणवत्ता बिना धुएं, आग, डीजल की भट्ठियों तुलना में बेहतर होती है। इन भट्ठियों की गुणवत्ता को देखते हुए क्षेत्र के कई गांवों में मावे की भट्ठी चलाने वाले दुकानदार भाप वाली भट्ठी के प्रोजेक्ट को लगवाने में काफी रुचि ले रहे हैं। किसी तरह की आग धुआं होने के चलते कारीगर भी इन भट्ठियों पर काम करके खुश होंगे। गांव दमगढ़ी निवासी मावा भट्ठी संचालक शमीम त्यागी ने बताया कि डेढ़ से दो लाख रुपये की लागत से तैयार होने वाले बायलर भाप भट्ठी प्रोजेक्ट को लगवाने में लोगों का रूझान बढ़ा है। हालांकि अभी तक हरियाणा, दिल्ली, पंजाब में इस तकनीक का प्रयोग हुआ है। अब इसके फायदों को जानकर मावा भट्ठी संचालकों के साथ-साथ मिठाई की दुकानें चलाने वाले भी काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।