शहर काजी प्रो. जैनुस साजिदीन का इंतकाल होने के बाद उनके बेटे डॉ. जैनुस सालिकीन सिद्दीकी को शहर काजी बनाया गया था। इसका कारी शफीकुर्रहमान ने विरोध कर दिया था। उनका कहना था कि सालिकीन नाअहल यानी इस पद के लायक नहीं है, वह आलिम भी नहीं है। वह तो अलीगढ़ में रहते हैं, वह कैसे इस जिम्मेदारी को उठा सकते हैं। कैसे ईद की नमाज ऐसे व्यक्ति के पीछे पढ़ी जाएगी, जो आलिम है ना मौलवी।
इस पर डॉ. सालिकीन ने कहा था कि वह कारी शफीकुर्रहमान के बारे में कुछ नहीं कहेंगे। बस इतना ही कहना चाहेंगे कि उनका परिवार मुगलों के वक्त से ही शहर काजी पद की जिम्मेदारी निभाता आ रहा है। वे अपने परिवार की परंपरा के अनुसार शहर में अमन और शांति का पैगाम देते हुए शहर काजी पद पर काम करेंगे।
बीते शुक्रवार को जामा मस्जिद में कारी शफीकुर्रहमान को लोगों ने तकरीर करने के लिए माइक तक नहीं दिया था और उनका जोरदार विरोध कर दिया था। सोमवार को कारी शफीकुर्रहमान ने यू टर्न ले लिया।
वेस्ट एंड रोड स्थित कैसल व्यू में जिम्मेदारों की बैठक हुई, इसमें कारी शफीकुर्रहमान ने कहा कि डॉ. सालिकीन ही शहर काजी हैं और पूर्व की तरह वह अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। वहीं डॉ. सालिकीन ने भी कहा कि वह कारी शफीकुर्रहमान को अपने वालिद की तरह समझेंगे, साथ ही कारी ही ईद की नमाज से पहले तकरीर करेंगे। डॉ. सालिकीन ईद की नमाज पढ़ाएंगे। इस दौरान दोनों पक्षों से एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी कराए गए।