बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को भाजपा, कांग्रेस और सपा पर तीखा हमला किया। मायावती सिकंदराबाद में बुलंदशहर और गौतमबुद्धनगर लोकसभा क्षेत्र की संयुक्त और गाजियाबाद में आयोजित जनसभा में बोल रही थीं।
बुलंदशहर में प्रदीप जाटव और गौतमबुद्धनगर से सतीश अवाना के लिए समर्थन मांगते हुए उन्होंने बढ़ते भ्रष्टाचार को गंभीर मुद्दा बताकर कहा कि इसे रोकने के लिए बना मौजूदा कानून (लोकपाल) कमजोर है। विदेशों में जमा काला धन वापस लाया जाए, तभी देश में विकास तेज हो पाएगा।
उन्होंने भी मोदी की तर्ज पर राहुल गांधी को शहजादा कहकर पुकारा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले ही शहजादे को पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर रखा है।
सपा, भाजपा और कांग्रेस पर तीखा हमला
सपा पर आरक्षण समाप्त करने की साजिश रचने का आरोप जड़ा। नरेंद्र मोदी के पीएम बनने पर देश में दंगे होने का खतरा जताया। वेस्ट यूपी को अलग राज्य बनाने और यहां हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग का समर्थन किया।
गाजियाबाद पहुंचीं मायावती ने मुस्लिम-दलित के समीकरण को साधने का प्रयास किया। प्रत्याशी मुकुल उपाध्याय के समर्थन में आयोजित सभा में उन्होंने विकास और सुरक्षा को आधार बनाकर अपने चार बार के कार्यकाल का हवाला दिया।
उन्होंने कांग्रेस को भ्रष्टाचार और महंगाई पर, भाजपा को दंगों और गोधरा पर और सपा को बिगड़ी कानून व्यवस्था और कमजोर प्रशासन के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने देश की सीमाओं की सुरक्षा, सच्चर कमेटी को लागू करने, गरीब सवर्णों को आरक्षण देने, विदेशों से काला धन वापस लाने तथा बेहतर आर्थिक नीतियां बनाने को बसपा की प्राथमिकता बताया।
मंच पर मायावती का खौफ
प्रशासक के रूप में मायावती का खौफ गाजियाबाद के कविनगर में चुनावी जनसभा के मंच पर नजर आया। चुनावी सभाओं और पार्टी सुप्रीमो के आने पर अन्य पार्टियों के विधायक और पदाधिकारी जहां अपने चेहरे चमकाने के लिए एक-दूसरे को मंच से धकियाते नजर आते हैं, वहीं बसपा के विधायक और पदाधिकारी मायावती के आने पर पीछे खडे़ नजर आए।
जब भाषण समाप्त होने के बाद मायावती ने स्वयं ही पार्टी प्रत्याशी मुकुल उपाध्याय, विधायक सुरेश बंसल, जाकिर अली, वहाब चौधरी को अपने बराबर में आने को कहा तो एक बारगी उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। सभी एक-दूसरे का मुंह देखने लगे। विधायक सुरेश बंसल ने तो मायावती से पूछ भी लिया कि ‘क्या बहन जी आप हमें बुला रही हैं।’ मायावती के हां कहने के बाद भी विधायक और पदाधिकारी सहमे-सहमे से उनके पास पहुंचे और उपस्थित जनसभा से अभिवादन लिया।
इसे बसपा सुप्रीमो का खौफ ही कहा जाएगा कि मंच के आसपास भी पार्टी के किसी अन्य नेता या पदाधिकारी की फोटो तक नहीं थी। खुद बसपा प्रत्याशी मुकुल उपाध्याय की एक फोटो मंच से बहुत दूर गेट के पास लगे एक पोस्टर पर थी।