मऊ। नवंबर माह के तीसरे सप्ताह में ही सर्दी शुरू होते ही नाक, कान और गले के मरीजों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। साथ ही दीपावली के बाद से बढ़ा प्रदूषण भी बीमारी इजाफा करने में बड़ा कारण बना है। जिला अस्पताल के ईएनटी ओपीडी में प्रतिदिन 80 से अधिक मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
सर्दी बढ़ने तथा वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। इसके अलावा नाक, कान तथा गले में दिक्कत के मरीज भी बढ़े हैं। चिकित्सक धूल, मिट्टी से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। इस प्रदूषित वातावरण में मास्क लगाने के लिए कहा जा रहा है।
इस संबंध में जिला अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. आरआर चौहान ने बताया कि सर्दियों में तमाम बीमारियों के साथ नाक, कान और गले के मरीज भी बढ़ जाते हैं। इसकी प्रमुख वजह सर्दी की वजह से इंफेक्शन होना है। जिन मरीजों को टांसिल की समस्या रहती है, उनकी समस्या सर्दियों में और बढ़ जाती है। उन्हें सोते वक्त सांस लेने में तकलीफ होती है। कुछ भी ठंडा पेय पदार्थ या आइसक्रीम खाने पर भी यह समस्या बढ़ती है। सर्दियों में हवा में नमी की वजह से प्रदूषण अधिक रहता है, जिसकी वजह से नाक और गले के मरीजों को इंफेक्शन की समस्या रहती है। इन दिनों भी ज्यादातर मरीज इसी तरह के आ रहे हैं। ऐसे मरीजों को सर्दी से बचाव करना चाहिए। ठंडी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए।
इस तरह रखे खुद ख्याल
- गुनगुना पानी का सेवन करें। नमक के पानी से गरारे करें।
- हर्बल चाय व दूध का सेवन करें। गुड़, चना और मूंगफली खाएं।
- धूप निकलने के बाद ही टहलें, बीमार लोग छत पर टहलें।
- कान-नाक ढककर रखें, बच्चों को धूप निकलने पर ही बाहर खेलने दें।