मऊ। पंचायत राज विभाग में शासनादेशों के विपरीत ग्राम पंचायत अधिकारियों और ग्राम विकास अधिकारियों की तैनाती की गई है। किसी कर्मचारी को छह गांव दे दिए गए हैं तो किसी को एक गांव जबकि 50 कर्मियों को एक भी गांव आवंटित नहीं किए गए हैं। वर्तमान में जिले में 675 गांव में 159 कर्मियों में 81 ग्राम विकास अधिकारी और 78 ग्राम पंचायत अधिकारी मौजूद हैं। गांवों में विकास कार्य को गति देने के लिए शासन की तरफ से गांवों में ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों की तैनाती की गई है।
ग्राम पंचायत अधिकारियों की कमी को देखते हुए शासन की तरफ से 2013 में गांवों में सचिवों की तैनाती करने का निर्देश जारी किया गया। यह भी प्रावधान किया गया था कि ग्राम पंचायत और ग्राम विकास अधिकारी के बीच बराबर बराबर गांवों का आवंटन कर दिया जाए। इस कार्य की जिम्मेदारी जिला पंचायत राज अधिकारी को दी गई है। शासन की ओर से यह भी निर्देश दिया गया कि गांवों के आवंटन का कार्य डीपीआरओ के प्रस्ताव पर सीडीओ के माध्यम से जिलाधिकारी की ओर से किया जाएगा। लेकिन शासनादेश की उपेक्षा करके ग्राम पंचायत और ग्राम विकास अधिकारियों को गांवों का आवंटन किया गया हैं। किसी सेक्रेटरी को छह गांव दिए गए हैं तो किसी को एक गांव भी नहीं।
50 कर्मचारियों के पास कोई गांव नहीं:
जिले में अभी भी ग्राम पंचायत अधिकारियों की कमी चल रही हैं। जिले में ग्राम पंचायत अधिकारियों की कुल संख्या 78 है जबकि 81 ग्राम विकास अधिकारी हैं । इस प्रकार कुल 159 कर्मियों के जिम्मे 675 गांवों का विकास कराने की जिम्मेदारी हैं। लेकिन इनमें से 50 सेक्रेटरियों के पास एक भी गांव ही नहीं हैं।