मऊ/मुहम्मदाबाद गोहना। मऊ शहर, तीन नगर पंचायतों और 50 ग्राम पंचायतों में बंदरों का उत्पात बढ़ता जा रहा है। खाली पेट बंदर खूंखार हो गए हैं। राह चलते लोगों और स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों को बंदर आए दिन निशाना बना रहे हैं। स्थिति यह है कि बंदर सड़कों पर बेखौफ घूम रहे हैं, जबकि लोग घरों में जालियां लगवाकर कैद होने के लिए मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि इन्हें काबू करने और पकड़ने की कोई व्यवस्था नहीं है। बुधवार को हमारी पड़ताल में आया कि जिला अस्पताल के रेबीज टीकाकरण कक्ष में रोज 150 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से 10 फीसदी बंदर काटने के मामले होते हैं। नगर पालिका और वन विभाग की खींचतान के बीच कोई स्थायी समाधान निकलने की उम्मीद फिलहाल नजर नहीं आ रही है। बीते रविवार को ही बंदरों के झुंड से बचने के लिए मुहम्मदाबाद गोहना कस्बे में एक युवक छत से नीचे कूद गया था।
मुहम्मदाबाद गोहना कस्बे से लेकर करहां सहित 15 ग्राम पंचायतों में सैकड़ों की संख्या में बंदर झुंड बनाकर घूमते दिखाई दिए। रात में दुकान बंद कर घर जाने वाले व्यापारियों की अस्थायी दुकानों की पॉलीथिन, टाट और लकड़ी की पट्टियां तोड़कर बंदर सामान बर्बाद कर दे रहे हैं। पांच टीमें जिले के अलग-अलग जगहों पर बंदरों के उत्पात से परेशान ग्रामीणों से बात करने पहुंचीं। वहां दिखा कि बंदर राह चलते लोगों के हाथ से झोला छीनकर भागते दिखे। बंदरों के हमले में मुहम्मदाबाद गोहना कस्बे से लेकर इस क्षेत्र के गांवों में दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं।
कई लोगों को काटकर घायल कर चुके हैं बंदर
बीते सप्ताह कस्बे के भूलीपुर मोहल्ला निवासी ज्ञानेश्वर विश्वकर्मा को बंदरों ने दौड़ा लिया था। वह जान बचाने के लिए छत से कूद गए, जिससे उनके दोनों पैरों में चोट लगी है। करहां की धन्या वर्मा, चकजाफरी के स्वामीनाथ सिंह, करहां की मधुबाला, आतागंज के शमशाद अहमद, करहां की ही गीता देवी, आनंद और करहां की ग्राम प्रशासक पूनम जायसवाल भी बंदरों के हमले में घायल हो चुकी हैं। मुहम्मदाबाद गोहना कस्बे का ब्लॉक परिसर, रोडवेज, तहसील परिसर, मुख्य बाजार का विजय स्तंभ, निबंधन कार्यालय के आसपास झुंड बनाकर हजारों बंदर दिनभर उत्पात मचा रहे हैं।
इन जगहों पर उत्पात मचाता है बंदरों का झुंड
मऊ नगर पालिका के 20 मोहल्ले, मुहम्मदाबाद गोहना कस्बा, दोहरीघाट नगर पंचायत, अदरी नगर पंचायत। मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के करहां, चकजाफरी, जमुई, भैसहा, रसूलपुर, आतागंज, बीच महाल, दरौरा, गद्दोपुर, तिघरा, माहपुर, घुटमा, महमूदपुर, परवा, नगपुर ग्राम पंचायत में बंदरों की संख्या अधिक है।
इसके अलावा फतहपुर मंडाव ब्लॉक के महुई, मर्यादपुर, घोसी ब्लॉक के पवनी, अमिला रेलवे स्टेशन, चिरैयाडॉड, हेमई, कोपागंज ब्लॉक के इंदारा, कसारा, खुरहट और भटौली में भी बंदरों की संख्या अधिक है। इसी तरह परदहां ब्लॉक के कहिनौर, पिपरीडीह, मजखनी आदि गांवों में लोग बंदरों से परेशान हैं।
पिछले 10 वर्षों से क्षेत्र के किसान, व्यवसायी, बुनकर सभी बंदरों के उत्पात से आजिज हैं। रोज कुछ न कुछ नया नुकसान होता है। बंदरों के उत्पात और फसलों को नुकसान से खेती की लागत भी निकलना मुश्किल हो गया है। - नागेंद्र सिंह, किसान, करहां
बंदरों के उत्पात से साग-सब्जी, खेती-किसानी, घर का कपड़ा और अन्य छोटा-मोटा सामान का काफी नुकसान हो रहा है। बंदरों को भगाने पर एक झुंड होकर हमला करने पर आमादा हो रहे हैं, जिससे हम सभी भयभीत हैं। - रीता देवी, दरौरा
रेबीज टीकाकरण कक्ष में पहुंचे मरीज
दिन
टीकाकरण
02 अक्तूबर छुट्टी
03 अक्तूबर 180
04 अक्तूबर छुट्टी
05 अक्तूबर 160
06 अक्तूबर 130
07 अक्तूबर दोपहर 12:37 बजे
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शासन के नए जीओ में इसकी जिम्मेदारी वन विभाग की नहीं है। बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत, नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर दी गई है। - पीके पांडेय, डीएफओ, मऊ