मऊ। जिले में सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान योजना दम तोड़ रही है। एक महीने से आयुष्कामन मरीजों का उपचार बंद है। सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं न मिलने से आयुष्मान लाभार्थियों की पसंद निजी अस्पताल बन रहे हैं। सितंबर 2018 से शुरू हुई आयुष्मान योजना में छह साल में करीब 4 हजार लाभार्थियों ने उपचार कराया। जबकि निजी अस्पतालों में यह संख्या आठ गुनी यानी 35 हजार से ज्यादा है। चौंकाने वाली बात है कि बीते एक माह से जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल में आयुष्मान मरीजों का उपचार में कोताही बरती जा रही है। योजना के तहत जिले के सभी 52 सरकारी अस्पताल पंजीकृत हैं, लेकिन उपचार जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और कुछ सीएचसी को छोड़कर कहीं नहीं होता है।
25 लाख की आबादी वाले मऊ जिले में आयुष्मान योजना के तहत 7.56 लाख 981 लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड बना है, इसकी तुलना में वर्तमान में 7.28 लाख लाभार्थियों का आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत 53 निजी और 52 सरकारी अस्पतालों में उपचार मिलना है। लेकिन आंकड़ें बयां कर रहे हैं योजना के लाभार्थियों के लिए सरकारी अस्पताल इलाज के लिए मुफीद नहीं साबित हो रहे हैं। 4113 मरीज जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में अपना उपचार करा चुके हैं। इसमें 95 फीसदी मरीजों ने तो जिला अस्पताल और महिला जिला अस्पताल में उपचार कराया है, वहीं पांच फीसदी में कोपागंज, घोसी, दोहरीघाट, फतेहपुर मंडाव सीएचसी में मरीज हैं। दूसरी तरफ बीते छह साल में पंजीकृत निजी अस्पतालों में 35 हजार 768 मरीजों ने उपचार कराया है। वहीं पांच हजार से ज्यादा मरीजों ने दूसरे जिलों में जाकर उपचार कराया है।
सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान लाभार्थियों को तवज्जो नहीं
नियमानुसार पंजीकृत अस्पतालों में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को निशुल्क सुविधा की लाभ का प्रावधान है। योजना का लाभ सरकारी अस्पतालों में मिलता नहीं दिख रहा है। इसके पीछे अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, संसाधनों का अभाव, मौजूद डॉक्टरों की रुखा स्वभाव लाभार्थियों के उपचार में बाधा है। आयुष्मान योजना में शामिल एक लाभार्थी ने नाम न छापने पर बताया कि वह कई दिनों से भांजे के उपचार के लिए जिला अस्पताल का चक्कर काट रहा था, लेकिन डॉक्टर के न मिलने पर उसे निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ा।