मऊ। गाजीपुर के मरदह थाना क्षेत्र के नरवर में काशीदास पूजा की तैयारी से पहले हाईटेंशन तार की चपेट में आने से मृत चारों युवकों के शवों के पोस्टमार्टम के लिए एसीएमओ की निगरानी में तीन टीमों का गठन किया गया था। तीन टीमों में छह डॉक्टरों ने शवों का पोस्टमार्टम किया।
घटना के बाद परिजन उन्हें जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। हाइटेंशन तार की जद में आने से बड़ी संख्या में लोगों के झुलसने की सूचना पर निजी अस्पताल में आठ डाक्टरों की टीम ने झुलसे लोगों का उपचार शुरू किया।
इस दौरान डाक्टरों ने रविंद्र यादव, अजय यादव, छोटेलाल यादव और अमन यादव को मृत घोषित कर दिया। जबकि अमेरिका यादव को हायर सेंटर और संतोष एवं जितेंद्र यादव को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। उधर इस बड़ी घटना पर सीएमओ डॉ. राहुल सिंह ने एसीएमओ डॉ. आरएन सिंह की निगरानी में तीन टीमें गठित की, जिनमें छह डाक्टरों ने चारों शवों का पोस्टमार्टम किया।
पोस्टमार्टम हाउस पर लगा रहा लोगों का तांता
मऊ। सुबह हुए हादसे की सूचना कुछ देर बाद सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। इसके बाद ही कुछ देर में निजी अस्पताल में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ पहुंच गई। उधर घटना के बाद गाजीपुर के एएसपी, कासिमाबाद सीओ अनिल तिवारी, जंगीपुर विधायक डाॅ. वीरेंद्र यादव, सपा नेता धर्मेन्द्र सोलंकी, पूर्व जिलाध्यक्ष सपा मऊ शैलेन्द्र यादव साधू, जिला पंचायत अध्यक्ष मऊ मनोज राय सहित बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। एक साथ एक ही गांव के चार युवाओं की मौत से उनके परिजनों की चीख पुकार सुनकर पूरा अस्पताल मातमी माहौल में बदल गया।
अस्पताल में सुविधाएं नहीं, निजी अस्पताल ले गए
मऊ। गाजीपुर जिले के मरदह थानाक्षेत्र के नरवर गांव में हुए हादसे ने मऊ जिला अस्पताल में सुविधाओं की पोल खोल दी। हादसे में झुलसे दो युवाओं को प्राथमिक उपचार के बाद निजी अस्पताल ने जिला अस्पताल रेफर किया तो यहां सुविधा न होने पर कुछ देर बाद दोनों मरीजों को नगर के दूसरे निजी अस्पताल लेकर जाना पड़ा। उधर, इस लापरवाही पर अस्पताल का कहना है कि दोनों मरीज खुद ही निजी अस्पताल चले गए।
हाईटेंशन तार के संपर्क में आए हरे बांस में उतरे करंट से झुलसे लोगों को परिजनों को कुछ नहीं सूझा तो वे उन्हें एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां गंभीर रूप से झुलसे अमेरिका को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। साथ ही संतोष यादव और जितेंद्र यादव को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। मरीज जिला अस्पताल में करीब साढ़े नौ बजे के बाद पहुंचे लेकिन महज कुछ देर रहने के बाद ही उनके परिजन उन्हें दूसरे निजी अस्पताल लेकर चले गए। सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि मरीज आए थे लेकिन खुद अपनी मर्जी से निजी अस्पताल चले गए। उन्हें रोकने का प्रयास किया गया लेकिन वे नहीं माने।